अब हाईटेक बख्तरबंद प्लेटफार्म 90 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग होगा

नई दिल्ली। घरेलू सुरक्षा चुनौतियों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना की उभरती हुई परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्वदेशी रूप से उन्नत दो बख्तरबंद प्लेटफार्म (एपीपी, ट्रैक और पहिएदार) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि पुणे के अहिल्यानगर स्थित वाहन अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (वीआरडीई) में डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ.समीर.वी.कामत द्वारा इन प्लेटफार्म को रवाना किया गया। दोनों का डिजाइन के साथ विकास वीआरडीई द्वारा किया गया है। मंत्रालय ने बताया कि इन प्लेटफार्म पर 65 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री लगाई गई है। जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक करने की योजना है। निर्माण कार्य में पुणे स्थित मेसर्स टीएएसएल और मेसर्स बीएफएल द्वारा कई लघु और मध्यम उद्योगों के सहयोग लिया गया है। जिसकी मदद से अंत में रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को ही मजबूती मिली है।read more:https://pahaltoday.com/passenger-dies-after-falling-from-a-moving-train-body-found-near-railway-line/ यह प्लेटफॉर्म इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर दोनों भूमिकाओं को निभाने में सक्षम हैं। दोनों स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकास के साथ तैयार किए गए 30 मिमी क्रूलेस टरेट से लैस हैं। उच्च-शक्ति वाले इंजन और स्वचालित ट्रांसमिशन से युक्त होने के कारण इनमें अत्यधिक शक्ति-भार अनुपात, उच्च गति क्षमता, ढलान और बाधाओं को पार करने की क्षमता, मॉड्यूलर विस्फोट और बैलिस्टिक सुरक्षा के साथ ‘स्टैनेज’ स्तर 4 और 5 की सुरक्षा है। प्लेटफार्म की गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इनमें उन्नत विशेषताओं का समावेश किया गया है। हाइड्रो जेट्स सहित जल बाधाओं को पार करने की बेहतर क्षमता वाला उभयचर मॉडल इन दोनों को परिचालन लचीलापन प्रदान करता है। जबकि 30 मिमी. क्रूलेस टरेट और 7.62 मिमी. पीकेटी गन को टैंक रोधी गाइडेड मिसाइलों को लांच करने के लिए इनमें शामिल किया गया है।

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