नई दिल्ली। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू हुआ था। ये सत्र काफी हंगामेदार रहा, लेकिन इसके बावजूद इसमें खूब काम हुआ। बजट सत्र के बाद महिला आरक्षण पर विचार करने के लिए तीन दिन के विशेष सत्र के आखिरी दिन कोई काम नहीं हुआ और शनिवार सुबह लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिए गए। सत्र में 2026-27 के लिए यूनियन बजट और अलग-अलग मंत्रालयों के लिए ग्रांट और सप्लीमेंट्री ग्रांट की मांगें पास की गईं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बजट सत्र में कुछ खास कानून भी पास हुए, जिनमें जन विश्वास बिल-2026, ट्रांसजेंडर पर्सन्स अमेंडमेंट बिल-2026, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज़ बिल 2026 और आंध्र प्रदेश रीऑर्गेनाइज़ेशन बिल-2026 शामिल हैं। विपक्ष के कड़े विरोध के बाद सरकार ने सत्र के दौरान फॉरेन कंट्रीब्यूशन अमेंडमेंट बिल-2026 पर चर्चा नहीं की। बजट सत्र में लोकसभा में 93 फीसदी काम हुआ, जबकि राज्यसभा में 110फीसदी काम हुआ। इस सत्र में केंद्र सरकार में कई काम पहली बार हुए। विपक्ष ने पहली बार चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का नोटिस दिया, जिसे स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमैन ने खारिज कर दिया।read more:https://khabarentertainment.in/womens-participation-will-be-strengthened-through-the-nari-shakti-vandan-act-dr-deepti-singh/
विपक्ष के विरोध के बीच पीएम मोदी भी राष्ट्रपति के भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब नहीं दे सके। स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस बहस के बाद वॉयस वोट से खारिज हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक बजट सत्र के पहले हिस्से में परेशानी तब शुरू हुई जब लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को एक पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड किताब के कुछ हिस्से बताने की इजाज़त नहीं दी गई, जिससे हंगामा शुरु हो गया। इसके कारण आठ विपक्षी सांसदों को बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि सत्र के दूसरे हिस्से में सस्पेंशन वापस ले लिया गया। शनिवार को स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा ने पेश किए गए 12 बिलों में से 9 पास करके 75फीसदी सक्सेस रेट हासिल किया है और 151 घंटे और 42 मिनट में 31 बैठकें हुईं। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026, और डिलिमिटेशन बिल, 2026 पर 21 घंटे 27 मिनट से ज़्यादा चर्चा हुई, जिसमें 131 सदस्यों ने अपने विचार रखे। यह संविधान संशोधन बिल सदन से पास नहीं हुआ। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक रुकावटों और जबरदस्ती स्थगन के कारण 53 घंटे और चार मिनट बर्बाद हुए। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि सत्र के दौरान राज्यसभा ने 157 घंटे और 40 मिनट तक काम हुआ। उन्होंने बताया कि स्पेशल सिटिंग के दौरान हरिवंश को तीसरे टर्म के लिए डिप्टी चेयरमैन चुना गया है। उन्होंने कहा कि 117 सवाल उठाए गए, ज़ीरो-आवर में 446 सबमिशन और 207 स्पेशल मेंशन किए गए।