राष्ट्र में पुरूषों के साथ- साथ महिलाओ और किन्नर समाज को समतामूलक समान पहचान स्थापित की जाए- राष्ट्रीय नागरिक पार्टी

कृष्ण कुमार गौतम

राष्ट्रीय नागरिक पार्टी अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम

राष्ट्रीय नागरिक पार्टी अध्यक्ष कृष्ण कुमार गौतम ने राष्ट्र के पुरूषों के साथ साथ महिलाओ और किन्नर समाज को राजनैतिक न्याय, समाज में एक समान पहचान तथा किन्नर को पैदा हुए परिवार की पैतृक सम्पति में भागीदार और अभिभावक/ संरक्षक नाम कानून का दर्जा देकर सामाजिक न्याय की व्यवस्था विकसित करने के लिए आंध्र प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, आसाम राज्य, बिहार राज्य, छत्तीसगढ राज्य, गोवा,गुजरात राज्य, हरियाणा प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, झारखंड राज्य, कर्नाटक राज्य, केरल राज्य, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र राज्य, मणिपुर राज्य, मेघालय राज्य, मिजोरम राज्य, नागालैंड राज्य, उड़ीसा राज्य, पंजाब राज्य, राजस्थान राज्य, सिक्किम राज्य, तमिलनाडू राज्य, तेंलगान राज्य, त्रिपुरा राज्य, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड राज्य, वेस्ट बंगाल राज्य के राज्यपालों तथा केन्द्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप, चंडीगढ, दिल्ली, दादर और नगर हवेली और दमन दीयू, जम्मू-कश्मीर, लक्ष्यद्वीप, लद्दाख व पांडिचेरी के उपराज्यपाल तथा प्रशासक को ज्ञापन भेजकर मांग की गई कि राष्ट्र में पुरूषों के साथ साथ महिलाओ और किन्नर समाज को समतामूलक राजनैतिक न्याय, अर्थात स्त्री 49 प्रतिशत, पुरूष 49 प्रतिशत व 2 प्रतिशत किन्नर समाज, राष्ट्र की जनसंख्या जनगणना में स्त्री, पुरूष के साथ साथ किन्नर समाज की भी समान पहचान स्थापित की जाए, ताकि राष्ट्र की नीति निर्धारण में हर क्षेत्र में समतामूलक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाए तथा स्त्री, पुरूष के साथ साथ किन्नर समाज के नागरिक को पैदा हुए परिवार की पैतृक सम्पति में भागीदार और अभिभावक/ संरक्षक नाम के साथ सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गई। राज्यपाल, उपराज्यपाल, सभापति, उपसभापति, तथा संवैधानिक पदों पर रोटेशन में नियुक्त किए जाए।भारतीय संविधान उद्देशिका और राष्ट्रीय नागरिक पार्टी की विचार धारा ” समतामूलक नागरिक प्रतिनिधित्व भारत स्थापित” करने को लेकर माननीया राष्ट्रपति महोदया को भेजे गए ज्ञापन का असर केन्द्र सरकार की योजनाओं में दिखने को मिल रहा हैं, अब महिलाओ को भारत की संसद और विधान सभाओं में 33% आरक्षण देने के लिए संसद में पास किए गए ‘ नारी शक्ति वंदन अधिनियम ‘ में संशोधन कर आरक्षण निर्धारित किया जा रहा हैं। जो अभी स्त्री 49 % प्रतिनिधित्व और किन्नर समाज के 2 % प्रतिनिधित्व के बिना अधिनियम अधूरा है।संविधान के अनुच्छेद-82 के तहत- प्रत्येक जनगणना के पश्चात पुन: समायोजन- प्रत्येक जनगणना की समाप्ति पर राज्यों को लोक सभा में स्थानों के आवंटन और प्रत्येक राज्य के प्रादेशिक निर्वाचन- क्षेत्रों में विभाजन का ऐसे प्राधिकारी द्वारा और ऐसी रिति से पुन: समायोजन किया जाएगा जो संसद विधि द्वारा अवधारित करे:परन्तु ऐसे पुन: समायोजन से लोक सभा में प्रतिनिधित्व पर तब तक कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा जब तक उस समय विद्यमान लोक सभा का विघटन नहीं हो जाता हैं:11[परन्तु यह और कि ऐसा पुन: समायोजन उस तारीख से प्रभावी होगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट करे और ऐसे पुन: समायोजन के प्रभावी होने तक लोक सभा के लिए कोई निर्वाचन उन प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्रों के आधार पर हो सकेगा जो ऐसे पुन: समायोजन के पहले विद्यमान है:परन्तु यह और भी कि जब तक सन 1[ 2026 ] के पश्चात की गई पहली जनगणना के सुसंगत आंकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते हैं तब तक 2[ इस अनुच्छेद के अधीन, –(i) राज्यों को लोक सभा में 1971 की जनगणना के आधार पर पुन: समायोजित स्थानों के आंवटन का; और (ii ) प्रत्येक राज्य के प्रादेशिक निर्वाचन- क्षेत्रों में विभाजन का, जो 3[ 2001 ] की जनगणना के आधार पर पुन: समायोजित किए जाएं,पुन: समायोजन आवश्यक नहीं होगा।]विदित रहे 1972 में सीटों को आखिरी बार रिवाइज किया गया 1952,1963,1973,और 2020 में परिसीमन आयुक्त का गठन हुआ था। लेकिन, 1972 में सीटों को आखिरी बार संशोधन किया गया और लोक सभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 543 कर दी गई, लेकिन उसके बाद सीटों की संख्या में बढ़ोतरी नही हो पाई।राष्ट्रीय नागरिक पार्टी की भारत की राष्ट्रपति से मांग हैं कि अपनी केन्द्र सरकार विधायिका अर्थात लोक सभा,राज्य सभा,विधान सभा, विधान परिषद, केन्द्र शासित प्रदेश व स्थानीय निकाय, तथा कार्य पालिका,न्याय पालिका, पत्रिकारिता सहित समस्त क्षेत्र में स्त्री 49 प्रतिशत, पुरूष 49 प्रतिशत तथा 2 प्रतिशत किन्नर समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए ‘ समतामूलक नागरिक प्रतिनिधित्व भारत स्थापित ‘ करने के लिए संसद में बिल लाने की पहल करें।

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