प्रयास संस्था ने भिखाड़ियों के पुर्नवास योजना में सामाजिक संगठनों की भूमिका पर चर्चा आयोजित की

नई दिल्ली, 20 मार्च। भीख मांगना सबसे बड़ा अभिषाप है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक प्रस्ताव (चार्टर) बनाकर उसमें सामाजिक, नागरिक संगठनों के साथ सभी सहयोगी संगठनों को शामिल करे तो इस पर रोक लगाने में बहुत सफलता मिल सकती है। यह बात भिखाड़ियों के पुनरूत्थान में सामाजिक और सहयोगी संगठनों की भूमिका पर आयोजित एक चर्चा में उभरकर सामने आया। चर्चा प्रयास जेएसी ने आयोजित किया था। इसमें सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (स्माईल योजना) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, कानून प्रवर्तन निगम प्राधिकार, बाल कल्याण समिति (सीडब्लूडी), बाल मजदूर आयोग के साथ अन्य सरकारी और गैर सरकारी सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दिल्ली के लोधी रोड, इंडिया हैबीटेट सेंटर में प्रयास के संस्थापक आईपीएस अधिकारी रहे अमोद कुमार कंठ की अगुवाई और अवकाश प्राप्त न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण चर्चा मेंहरियाणा और दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारी रहे मनोज यादव, दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त अजय चौधरी, एमएचए टीआईसी के रजनीश क्वात्रा, एनएचआरसी के राघवेंद्र सिंह, विश्व युवक केंद्र के उदयशंकर सिंह, स्माईल के बेटकेंशन, जनसत्ता के वरिष्ठ पत्रकार अमलेश राजू, बिहार के बाल मजदूर आयोग के दिग्विजय, जम्मू कश्मीर से आए मुस्तफा सहित अन्य लोगों ने शिरकत की।वक्ताओं ने कहा कि भीख मांगने की परिभाषा ही अभी तक साफ नहीं हो पाई है। वैश्विक स्तर पर इसे आप एक अभिषाप की तरह देख सकते हैं। लाचार, दीन हीन, और शरीर से अपंग गरीब लोगों के भीख मांगने और बिना निवेश के सौ फीसद पाने के रूप में पेशा के रुप में अख्तियार लोगों के लिए भीख मांगने में अंतर है। सड़क पर जिन बच्चों को पेंसिल बेचने के एवज में कुछ पैसे मिलते हैं उसके भी तार एक गिरोह के जुड़े होते हैं और यह सभ्य समाज के लिए बहुत दुखद है।
अध्यक्षता करते हुए न्यायाधीश शिवकीर्ति सिंह ने कहा कि भीग मांगने की मजबूरी और भीख मांगने के रूप में ठगी दोनों में अंतर को समझना होगा। गरीब और अपंग का भीख मांगना और जरूरत के लिए मेहनत नहीं कर भीख मांगने पर निर्भर होना यह सबसे सोचनीय मुद्दा है। जबकि मनोज यादव ने कहा कि भीख मांगने को भी पर्यटन का रूप देने का चलन बढ़ता जा रहा है। प्रयागराज में कुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों में भिखाडियों की भीड़ बहुत कुछ कहने के लिए है। जबकि अजय चौधरी ने कहा कि धार्मिक ट्र्स्टों को इस मामले में आगे आने की जरूरत है। प्रयास के संस्थापक अमोद कुठ ने कहा कि भिखाड़ी कौन है? जो सार्वजनिक जगहों पर बदन खोलकर कुछ मांगता है या फिर उसके रूप दिखाने के कुछ और हैं और अंदर से कुछ और। सरकार को इस मुद्दे पर एक चार्जर बनाने की जरूरत है जिसमें सामाजिक और सहयोगी संगठनों को शामिल कर इसकी रोकथाम पर विचार होना चाहिए।

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