साहित्य और समाज के सेवक थे वीर सावरकर : सूर्यकांत केलकर

नई दिल्ली, । सावरकर विचार प्रवाह ने वीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के उपलक्ष्य में मालवीय भवन, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया । इस अवसर पर मुख्य अतिथि, निरंजन अखाड़ा के महामंडलेश्वर श्री राघवेंद्र भारती ने कहा कि सावरकर जी ने धर्म और राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। आज हम उनके कर्जदार हैं। राष्ट्र भक्ति में ही परमात्मा की भक्ति है। उन्होंने जनमानस से नशामुक्त भारत का आह्वान किया।read more:https://pahaltoday.com/strengthen-bhakiyu-tikait-which-is-fighting-the-farmers-battle-strongly-sunil-pradhan/राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सूर्यकांत केलकर ने कहा कि बंगला देश से घुसपैठ के सवाल को सबसे पहले वीर सावरकर ने उठाया था। असम के ग्वालपाड़ा में आज बांग्लादेशी घुसपैठियों में मुस्लिम की संख्या बढ़ी है उसकी चिंता सावरकर ने अपने समय में व्यक्त की थी। सावरकर देश के लिए समर्पित व्यक्ति थे। साहित्य और समाज दोनों के सेवक वीर सावरकर थे। महापौर शब्द उनका दिया हुआ है, हिंदी भाषा पर उनका अद्भुत चिंतन था। सावरकर ने कहा था, राजनीति का हिन्दूकरण और हिंदुओं का सैनिकीकरण होना चाहिए; इसकी आज जरूरत है। कार्यक्रम कि अध्यक्षता कर रहे अवश्वनी भारद्वाज ने कहा कि सावरकर जी भारत के सबसे महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी थे। इस अवसर पर श्री विजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि सावरकर जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाना चाहिए। वे मानवता को मजबूत करना चाहते थे। बीजेपी में दिल्ली प्रदेश के उपाध्यक्ष दिनेश प्रताप सिंह ने का।बाबा साहब भीमराव अम्बेडरक ने सेना में मुस्लिम सैनिकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई थी उसके बाद सावरकर जी हिन्दू समाज को सेना में जाने को प्रेरित किया। सेलूलर जेल में उन्हें बहुत यातना दी गयीं। जीवकांत झा ने स्वागत वक्तव्य दिया। योगी धनन्जय जी ने कहा कि भारत की धरती विरो से भरी पड़ी है उनमें से एक सावरकर जी थे। अनिर्बान दास जी ने कहा कि वीर सावरकर जी के विचार हर भारतीय के अंदर आज भी विद्यमान हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के रौशन सिंह ने वीर विनायक सावरकर जी का जीवन परिचय देते हुए कहा कि सावरकर जी ने रत्नागिरी में राजनीतिक रूप से नजरबंद रहते हुए भी बड़े महत्वपूर्ण कार्य किए।

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