पैथोलाजी सेंटरों पर अप्रशिक्षित कर्मी मरीजों के खून की कर रहे जांच

सोनभद्र। जिला मुख्यालय के प्रमुख शहर राबर्ट्सगंज में पैथोलॉजी सेंटरों के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप है कि शहर में बिना मानकों और बिना पर्याप्त प्रशिक्षित स्टाफ के बड़ी संख्या में पैथोलॉजी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जहां प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन के बजाय अप्रशिक्षित युवक मरीजों के खून के नमूने लेकर जांच कर रहे हैं। ऐसे में गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर मरीजों का उपचार होने का खतरा बढ़ गया है, जो सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है।read more:https://khabarentertainment.in/cattle-found-below-standards-and-shortage-of-fodder-observed-during-sdms-surprise-inspection/स्थानीय लोगों का कहना है कि राबर्ट्सगंज में पैथोलॉजी सेंटरों की बाढ़ सी आ गई है। जिस तरह हर गली-मोहल्ले में चाय-पान की दुकानें खुली दिखाई देती हैं, उसी तरह पैथोलॉजी सेंटर भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई केंद्रों पर न तो आवश्यक संसाधन हैं और न ही योग्य तकनीकी कर्मचारी, फिर भी मरीजों की जांच का काम बेरोकटोक जारी है। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर खड़ा हो रहा है। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और कथित संरक्षण के कारण यह गोरखधंधा वर्षों से फल-फूल रहा है। नियमित निरीक्षण, लाइसेंस सत्यापन और मानकों की जांच केवल कागजों तक सीमित है। यदि समय-समय पर प्रभावी कार्रवाई होती, तो नियमों की अनदेखी कर संचालित होने वाले पैथोलॉजी सेंटरों की संख्या इतनी नहीं बढ़ती। विशेषज्ञों का मानना है कि पैथोलॉजी की गलत रिपोर्ट किसी भी मरीज के इलाज की दिशा बदल सकती है। गलत जांच रिपोर्ट के कारण गलत दवाएं, अनावश्यक ऑपरेशन या गंभीर बीमारी का समय पर पता न चलने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे में यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विशेषज्ञों की संयुक्त टीम गठित कर शहर के सभी पैथोलॉजी सेंटरों की सघन जांच कराई जाए। बिना मानक, बिना योग्य तकनीकी स्टाफ अथवा नियमों के विपरीत संचालित सेंटरों को तत्काल सील कर संचालकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की जाए। उधर इस बावत सीएमओ से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मौजूद नहीं मिले। लिहाजा उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

 

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