मिर्जापुर की रूहानी फिजाओं में आज अकीदत और मोहब्बत का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुप्रसिद्ध सूफी संत सिपाही बाबा के 24वें सालाना उर्स के दूसरे दिन आज शहर की सड़कें आस्था के रंग में सराबोर नजर आ रही हैं।13 अप्रैल को कुरानखानी और नातिया मुशायरे के सफल आयोजन के बाद, आज का दिन बेहद ऐतिहासिक है।आज दोपहर 3 बजे कटरा कोतवाली से हजरत सिपाही बाबा की ‘शाही चादर’ का भव्य जुलूस निकाला गया। गाजे-बाजे और कव्वाली की गूंज के साथ उठा यह जुलूस गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। शहर के मुख्य रास्तों से होते हुए जब यह जुलूस जसोवर पहाड़ी स्थित ईदगाह के पीछे बाबा के मजार की ओर बढ़ रहा है, तो रास्ते भर जायरीनों का जोश देखते ही बन रहा है। हर तरफ ‘बाबा के दीवानों’ की भीड़ और खिदमत का मंजर दिखाई दे रहा है।जैसे-जैसे सूरज ढलेगा, जसोवर की पहाड़ियों पर कव्वाली की सुरीली जंग शुरू होगी। आज रात का मुख्य आकर्षण इलाहाबाद और बनारस के मशहूर कव्वालों के बीच होने वाला शानदार मुकाबला है। माना जाता है कि बाबा के दर पर जो भी सच्चे दिल से आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता। यही वजह है कि आज की रात हजारों जायरीन अपनी मन्नतें और दुआएं लेकर बाबा की चौखट पर हाजिरी लगाएंगे।कल यानी 15 अप्रैल को सुबह 8 बजे कुल शरीफ और रंग की महफिल के साथ इस तीन दिवसीय उर्स का समापन होगा, जहां लंगर और तबर्रुक का वितरण किया जाएगा। सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और मजार कमेटी ने जायरीनों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।