इंजीनियरिंग संकाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंः कुलपति

जौनपुर। किसी भी विश्वविद्यालय की प्रगति केवल उसके भवनों और संसाधनों से नहीं, बल्कि शिक्षकों की प्रतिबद्धता, विद्यार्थियों की प्रतिभा और नवाचार के प्रति उनकी दृष्टि से तय होती है। इसी सोच के साथ वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. के. सिंह ने इंजीनियरिंग संकाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए शिक्षकों से कंधे से कंधा मिलाकर काम करने तथा ‘मानवहित-राष्ट्रहित’ को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में इंजीनियरिंग संस्थान के समस्त संविदा एवं अतिथि प्रवक्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार की शाम आयोजित की गई। बैठक में शिक्षण की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम के आधुनिकीकरण, शोध, प्रोजेक्ट वर्क और विद्यार्थियों के कौशल विकास सहित विभिन्न शैक्षणिक विषयों पर चर्चा हुई।कुलपति ने कहा कि इंजीनियरिंग संकाय में अपार संभावनाएं हैं और यह संकाय विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए शिक्षकों को कर्तव्यनिष्ठा, कठिन परिश्रम और छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के विकास के लिए प्रत्येक कार्य की जिम्मेदारी निर्धारित होनी चाहिए और सभी को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करना चाहिए।उन्होंने बदलते तकनीकी परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम को अद्यतन करना आवश्यक है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/शिक्षकों को आसपास के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर उपयोगी बदलाव सुझाने चाहिए। साथ ही टाइम-टेबल को पुनरीक्षित कर नियमित कक्षाओं, शोध कार्यों और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।कुलपति ने इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत प्रोजेक्ट वर्क की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की रचनात्मकता और नवाचार को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने प्रबंधन के विद्यार्थियों की सकारात्मक सोच की भी प्रशंसा की और कहा कि अच्छे विचारों तथा रचनात्मक पहल करने वाले विद्यार्थियों की सराहना अवश्य की जानी चाहिए। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।उन्होंने युवा शिक्षकों से अपनी क्षमताओं को पहचानने, नई ऊर्जा के साथ कार्य करने और संस्थान के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया। विद्यार्थियों में अध्ययन की आदत विकसित करने के लिए उन्हें पुस्तकालय से जोड़ने, कौशल विकास पर जोर देने तथा विश्वविद्यालय में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।बैठक के समापन पर कुलपति ने कहा कि संस्थान की प्रगति सामूहिक प्रयासों से ही संभव है। सभी शिक्षकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने संविदा एवं अतिथि शिक्षकों की कार्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि अनेक चुनौतियों के बावजूद वे पूरी लगन से अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेने, नेतृत्व करने और विश्वविद्यालय के विकास में सक्रिय योगदान देने की अपील की।बैठक में इंजीनियरिंग संस्थान के समस्त संविदा एवं अतिथि प्रवक्ता उपस्थित रहे।

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