बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी कुछ समय देर हों, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। खासतौर पर बाराबंकी जिले की दरियाबाद विधानसभा सीट एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में है। इस सीट को लंबे समय से हॉट सीट माना जाता रहा है, जहां हर चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है। कांग्रेस, भाजपा, बसपा और अन्य दलों के संभावित उम्मीदवार अभी से जमीन पर सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसी बीच सपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता और समाजसेवी संतोष रावत ने दरियाबाद सीट से समाजवादी पार्टी से टिकट की मजबूत दावेदारी ठोक दी है। बता दें इस सीट पर पिछले विधानसभा चुनाव 2022 में बीजेपी के कद्दावर नेता एवं वर्तमान मंत्री सतीश शर्मा और सपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री अरविंद सिंह गोप के बीच सीधी टक्कर हुई थी। वहीं लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद ने भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह को दरियाबाद विधानसभा में बड़े अंतर से हराया था। जिसके बाद वह अयोध्या लोकसभा क्षेत्र की कई विधानसभाएं जीते और सांसद बने। वहीं संतोष रावत ने भी सतीश शर्मा के मुकाबले जातीय समीकरण के आधार पर अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। बता दें संतोष रावत साल 2000 से लगातार समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं। बीते 26 वर्षों में उन्होंने संगठन के लिए विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। संतोष रावत के पिता मास्टर राम दुलारे रावत ने कांग्रेस से राजनीति शुरू की। कुछ समय बाद वह बीएसपी से जुड़ गए। साल 1996 से 1998 तक वह बीएसपी के जिलाध्यक्ष रहे। वहीं साल 1998 में बाराबंकी लोकसभा सीट से बीएसपी प्रत्याशी भी रहे। साल 2000 में उन्होंने बीएसपी से किनारा करते हुए अपने बेटे संतोष रावत के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वर्तमान में संतोष रावत सपा के सक्रिय कार्यकर्ता के साथ-साथ होने के साथ ही पासी उत्थान समिति, उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। समाजवादी पार्टी में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनका आम जनमानस के बीच मजबूत नेटवर्क माना जाता है। सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी संतोष रावत की सक्रियता चर्चा में रही है। पासी उत्थान समिति, उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में समाज के उत्थान, संगठन विस्तार एवं सामाजिक अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। वर्तमान में भी संगठन के जरिए दलित समाज को मजबूत करने, सामाजिक जागरूकता एवं समाज हित के विभिन्न कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहे है। संतोष रावत का कहना है कि वह दरियाबाद विधानसभा से सपा टिकट के प्रबल दावेदार है। उन्होंने कहा, मैं पिछले 26 सालों से पार्टी के साथ जुड़ा हूं और लगातार संगठन व समाज के लिए काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी उन्हें मौका देती है तो वह दरियाबाद विधानसभा के विकास को नई दिशा देने का काम करेंगे। राजनीतिक जानकारों को मानना है कि दरियाबाद विधानसभा सीट पर इस बार भी मुकाबला काफी दिलचस्प रहने वाला है। अलग-अलग दलों के संभावित उम्मीदवार अभी से क्षेत्र में सक्रिय हो चुके है। ऐसे में संतोष रावत की मजबूत दावेदारी ने सभा की अंदरूनी राजनीति में भी हलचल तेज कर दी है। हालांकि अभी समाजवादी पार्टी की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यदि संतोष रावत को टिकट मिलता है, तो दरियाबाद विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी रोचक और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बहरहाल, आने वाले समय में यह देखना दिलचस्त होगा कि, क्या पार्टी हाईकमान इस सीट पर अपने 26 साल पुराने कार्यकर्ता संतोष रावत पर भरोसा जताता है।readmore:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/
अवधेश प्रसाद ने बदले भाजपा के समीकरण
बाराबंकी जिले की दरियाबाद विधानसभा सीट एक समय में यह सपा का गढ़ मानी जाती थी। जहां हड़हा नरेश स्वर्गीय राजीव कुमार सिंह का लंबे समय तक दबदबा कायम रहा। वह 6 बार विधायक और मंत्री रहे। हालांकि, 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सतीश शर्मा ने इस सीट पर कब्जा कर समीकरण बदल दिए। इसके बाद से यह सीट बीजेपी के प्रभाव वाली मानी जाने लगी। साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में सामान्य सीट पर सपा ने दलित नेता अवधेश प्रसाद को चुनाव लड़ाकर भाजपा के सारे समीकरण बदल दिए। अब भाजपा अपना खोया जनाधार वापस पाने की कोशिश में जुटी है।
जातीय समीकरण पर टिकी निगाहें
दरियाबाद विधानसभा में दलित मतदाताओं की संख्या अधिक है। यहां जातीय गणित हमेशा से निर्णायक रहा है। यहां पिछड़ा वर्ग, खासकर यादव वोट बैंक, मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जबकि सपा का पारंपरिक यादव-मुस्लिम वोट बैंक है। पिछले लोकसभा चुनाव में अवधेश प्रसाद को सपा ने अयोध्या से प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में उन्होंने दलित वोटों की मदद से दरियाबाद विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह को बूरी तरह हराया।