नागार्जुन। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने न केवल राज्य की सत्ता बदली है, बल्कि लोकतंत्र की उस ताकत को भी जीवंत कर दिया है जहां एक अकेला वोट भी हार-जीत का फैसला कर सकता है। तिरुप्पत्तूर सीट पर हुए कांटे के मुकाबले में डीएमके सरकार के सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन को मात्र 1 वोट के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा। टीवीके उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर ने इस रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल कर सबको चौंका दिया। अब वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और उनकी जमकर चर्चा हो रही है। अंतिम मतगणना के बाद सेतुपति को कुल 83,375 वोट मिले, जबकि पेरियाकरुप्पन को उनसे ठीक एक वोट कम मिला। यह चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक माना जा रहा है, जिसने यह साबित कर दिया कि चुनाव में हर एक मतदाता की भूमिका निर्णायक होती है। राज्य की सभी 234 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, जिसमें अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया है।’read more:https://khabarentertainment.in/grand-welcome-to-sp-district-president-honey-faisal/ हालांकि, इन नतीजों के बीच तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट की हार-जीत सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। पूरे राज्य के चुनावी परिदृश्य की बात करें तो टीवीके ने अपने पहले ही बड़े चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर कब्जा जमाया और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सत्ताधारी डीएमके को इस बार जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा और वह केवल 59 सीटों पर सिमटकर दूसरे स्थान पर रही। वहीं, एआईएडीएमके 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। अन्य दलों में कांग्रेस को 5 और पीएमके को 4 सीटें मिली हैं। पेरियाकरुप्पन जैसे कद्दावर मंत्री की महज एक वोट से हुई यह हार डीएमके के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका मानी जा रही है, जबकि टीवीके के लिए यह जीत उसके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का प्रतीक बन गई है।