नई दिल्ली : डिब्बाबंद और पैकेटबंद खाद्य उत्पादों को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है।FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पैकेज्ड फूड के फ्रंट यानी सामने के हिस्से पर लाल रंग के षट्कोणीय (Red Hexagonal) वॉर्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह लेबल उपभोक्ताओं को पैकेट में जरूरत से ज्यादा चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट होने के प्रति सीधे तौर पर सचेत करेगा।
पैकेट के सामने बड़े अक्षरों में छपेगी चेतावनी
प्रस्ताव के अनुसार, पैकेट के आगे “High Sugar” (अधिक चीनी), “High Fat” (अधिक वसा), “High Salt” (अधिक नमक) या “Highly Sweetened Beverage” (अत्यधिक मीठा पेय) जैसी चेतावनियां प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी।यह वॉर्निंग लेबल पैकेट के पीछे छपने वाली पोषण तालिका (Nutrition Table) के फॉन्ट साइज से काफी बड़े आकार में होगा, ताकि किसी भी उपभोक्ता की नजर उस पर तुरंत पड़ सके। यह मानक आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (ICMR-NIN) द्वारा जारी 2024 की डायटरी गाइडलाइंस पर आधारित होंगे।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/
दो चरणों में लागू होगा नियम, घी–तेल और शहद को छूट
FSSAI ने इस व्यवस्था को दो चरणों में लागू करने की योजना बनाई है, जिससे फूड इंडस्ट्री को अपने उत्पादों में सुधार करने का समय मिल सके।पहले चरण में उन उत्पादों पर लेबल लगेगा जिनमें दो या उससे अधिक हानिकारक पोषक तत्व तय सीमा से ज्यादा होंगे, जबकि दूसरे चरण में किसी एक भी तत्व के अधिक होने पर लेबल अनिवार्य किया जाएगा। हालांकि, सिंगल-इनग्रेडिएंट और प्राकृतिक रूप से फैट या मीठे उत्पाद जैसे घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद को इस नियम से छूट दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद FSSAI का रुख बदला
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने पहले स्पष्ट वॉर्निंग लेबल न लगाने पर नियामक को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि 2009 से 2023 के बीच भारत में अल्ट्रा-सेस्ड फूड्स का बाजार 150 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है, और इसी दौरान पुरुषों व महिलाओं में मोटापे की दर भी दोगुनी हो गई है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद ही FSSAI ने अपने पिछले रुख को बदलते हुए यह नया प्रस्ताव कोर्ट में पेश किया है।
विशेषज्ञों ने उठाए पहले चरण की शर्तों पर सवाल
न्यूट्रिशन एडवोकेसी इन द पब्लिक इंटरेस्ट के संयोजक डॉ. अरुण गुप्ता ने लाल हेक्सागोनल लेबल के कदम का स्वागत तो किया, लेकिन पहले चरण की ‘दो या उससे अधिक पोषक तत्व’ वाली शर्त को एक बड़ी खामी करार दिया।उनका कहना है कि यदि किसी उत्पाद में सिर्फ चीनी बहुत अधिक है और फैट कम है, तो पहले चरण के तहत उस पर कोई चेतावनी नहीं लगेगी, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिए से सही नहीं है। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर को तय की गई है।