सदर विधायक की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केन्द्र में खेत बचाओं अभियान और विश्व पर्यावरण दिवस का हुआ आयोजन 

ललितपुर – बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर में  रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केन्द्र में खेत बचाओं अभियान और विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन किया गया। माननीय विधायक द्वारा अपने संबोधन में भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित  किसानोपयोगी योजनाओं और जनपद मे खरीफ में हरी खाद के लिए उपलब्ध ढैंचा बीज की उपलब्धता के बारे मे जानकारी दी गई। मा. विधायक ने आह्वान किया कि हर किसान अपनी माँ के नाम कम से कम एक फलदार पौध को जरूर लगाए और इसकी परवरिश कर इससे भविष्य में लाभ उठाए। हर किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करायें एवं जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। जिस प्रकार हमारे भोजन की थाली में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है उसी प्रकार पौधों के भोजन में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से खेती की लागत बढ़ती है। मृदा की उर्वरता स्तर में गिरावट आती है। कृषक बंधु पशुओं की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, हरी खाद, नाडेप खाद, जैव उर्वरक, एनपीके, तरल उर्वरक का भी प्रयोग करें। केंद्राध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद द्वारा सभी अतिथिगणों और उपस्थित किसान समुदाय का स्वागत किया। खेत बचाओ अभियान अंतर्गत खेत की मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग करने और उससे होने वाले लाभ, हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा, लोबिया, मूंग, उर्द आदि दलहनी फसलों की बुवाई और समय से पलटकर खेत मे सड़ने के बाद खरीफ की फसलों की बुवाई के साथ ही जैविक उर्वरक, कम्पोस्ट खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने की विस्तृत जानकारी दिया गया। प्रत्येक किसान एक एकड़ में प्राकृतिक खेती करके डीएपी यूरिया की 25 प्र खपत कम करना, खेत में पराली ना जलाने और गर्मी की जुताई करने का सुझाव दिया गया। कृषक बंधुओं को कृषि विज्ञान केन्द्र से जुड़कर लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया। मृदा में पौधों/ कृषि वानिकी के लिए आवश्यक सभी 17 पोषक तत्वों जैसे नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि की संतुलित मात्रा प्रयोग के लिए डीएपी और यूरिया की कम से कम प्रयोग के साथ दूसरे स्रोत के प्रयोग करने के लिए अवगत कराया। read more:https://pahaltoday.com/loss-of-rs-1-8-lakh-crore-every-year-due-to-traffic-jams-in-metropolitan-cities-ahmedabad-brts-system-solution/राजेन्द्र कुमार साहू, जिला उद्यान अधिकारी द्वारा किसानों विभाग की विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी दिया गई।  हरीश शर्मा, अग्रणी बैंक प्रबंधक ने कृषकों को आवश्यकता अनुसार लोन उपलब्ध कराने के बारे में जानकारी दी गई। श्री सलिल अर्कवंशी, डीडीएम नाबार्ड ने एफ.पी.ओ. के गठन एवं सरकार द्वारा प्रदत्त वित्तीय लाभों के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. सरिता देवी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-गृह विज्ञान ने गृह वाटिका और पोषण वाटिका पर जानकारी दिया। डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/ नोडल अधिकारी-खेत बचाओ अभियान ने कार्यक्रम संचालन के साथ ही साथ तकनीकी जानकारी में बताया कि जिला ललितपुर के कृषक गत वर्ष (जनवरी से दिसंबर 2025) आवश्यकता से अधिक डीएपी/टीएसपी/एमएपी का 30073 मीट्रिक टन प्रयोग किया था। मृदा में यूरिया और डीएपी की आवश्यकता से अधिक और असंतुलित प्रयोग से मृदा में पोषक तत्वों का असंतुलन, मृदा उर्वरता में क्षीणता और उर्वरक उपयोग शमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कृषक बंधु यूरिया और डीएपी की असंतुलित प्रयोग की अपेक्षा मृदा परीक्षण, फसल की आवश्यकता और वैज्ञानिक संस्तुत के आधार पर एनपीके कॉम्प्लेक्स और एसएसपी उर्वरक का संतुलित प्रयोग कर अधिक लाभ उठा सकते हैं। कृषक बंधु हरी खाद (ढैंचा), जैव उर्वरक (राइजोबियम, पीएसबी), गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, नाडेप खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से भी अच्छी उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कृषक बंधु पौधों को दिये जाने वाले उर्वरकों का पौधों में क्या कार्य है, इसकी जानकारी पहले करें एवं उर्वरकों का प्रयोग सही मात्रा में सही समय पर और सही तरीके से ही करें। जिससे उनके धन का उचित उपयोग होगा और मिट्टी की उर्वरता के साथ वातावरण व मिट्टी का पर्यावरण भी स्वास्थ्य रहेगा। इस अवसर पर कृषकों को पशुओं के गोबर, मूत्र, बिछावन और चारा अवशेष से गुणवत्तायुक्त खाद बनाकर खेत में डालने के लिए जागरूक किया गया। जैविक खेती और प्राकृतिक खेती करने के लिए भी प्रेरित किया गया। कार्यक्रम मे किसानों को फलदार पौधों का वितरण किया गया । साथ ही  साथ सभी गणमान्य द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र के ऑर्चर्ड में आम के पौधों का वृक्षारोपण किया गया। इस कार्यक्रम में साईं ज्योति संस्था के  रमन शर्मा,  रमेश श्रीवास्तव,  राजेश सिंह, मुकुल शर्मा,  काशी राम सहित 5 गाँव के 50 से अधिक कृषक/ कृषक महिलाओं ने प्रतिभाग किया।

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