नई दिल्ली। म्यांमार के राष्ट्रपति अपने पहले विदेश दौरे पर भारत आए और भारत में अलग- लग मुद्दों पर जो चर्चाएं हुईं उनमें एक ऐसे मुद्दे पर बात हुई जो काफी समय से अटका था, लेकिन वह इतना अहम है कि इस पूरे इलाके की तस्वीर बदल सकता है। ये भारत की ‘लुक ईस्ट’ पॉलिसी है जिसपर जोर लगाने की कोशिश तो कई बार शुरू की गई लेकिन बात कई बार अटक भी गई। अब जब ईरान युद्ध के बाद दुनिया का हर देश अपने लिए हर क्षेत्र में अलग-अलग पार्टनर देख रहा है तो भारत के पूर्व दिशा वाले पड़ोस पर फिर फोकस जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत की लुक ईस्टस की नीति में बांग्लादेश तो एक बड़ी कड़ी है ही और वहां नई सरकार के साथ रिश्ते धीरे-धीरे समान्य करने की कोशिश हो भी रही है और बांग्लादेश इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि भारत के पूर्वोत्तर के राज्य चारों तरफ से घिरे हुए हैं, समुद्र की कनेक्टिविटी नहीं है वहां से इसलिए वहां से व्यापार में अड़चनें आती हैं।read more:https://khabarentertainment.in/103-patients-examined-in-health-camp-under-tb-free-india-campaign/एक सिलिगुड़ी के रास्ते संकरा-सा कॉरिडोर है जहां से होकर कोलकाता आना पड़ता है और तब जाकर पूर्वोत्तर के राज्यों को समुद्र का रास्ता मिलता है, क्योंकि बीच में बांग्लादेश है। भारत भी थाईलैंड तक रोड बना रहा है और म्यांमार के राष्ट्रपति अपने इस दौरे में उसपर पूरी बात भी कर के गए हैं। आईएमटी यानी इंडिया म्यांमार थाइलैंड हाईवे। योजना तो असल में बहुत पहले ही बन गई थी। 2002 में ही। 2002 में जब दुनिया चीन की सड़कों और बेल्ट ऐंड रोड पहल की बात कर रही थी, भारत ने भी एक बड़ा प्लान बना लिया था कि एक हाईवे बनाएंगे भारत से म्यांमार और म्यांमार से थाईलैंड। इसको कोलकाता-बैंकॉक एक्सप्रेसवे भी कहते हैं। सीधा कोलकाता से गाड़ी में बैठकर थाइलैंडय पहुंच जाएंगे। मतलब कोलकाता से मणिपुर और मणिपुर से म्यांमार और फिर वहां से थाईलैंड। ये कोई साधारण सड़क नहीं है बल्कि 1,360 किलोमीटर लंबा एक ऐसा रास्ता है जो भारत के मणिपुर के मोरेह से शुरू होकर म्यांमार के जंगलों और पहाड़ों से गुजरता हुआ थाईलैंड के माए सोट तक जाता है और ये थाईलैंड में भी रुकने वाला नहीं, प्लान इसे आगे कंबोडिया, फिर लाओस और आगे वियतनाम तक ले जाने का है।