बिजनौर। बिजनौर में वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मियों से जुड़े संगठनों ने ठेका और संविदा पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों को स्थायी किए जाने की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी बिजनौर के माध्यम से भेजा गया है, जिसमें सफाई कर्मियों के नियमितीकरण और वेतन संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग की गई है।read more:https://pahaltoday.com/explosion-on-railway-track-in-quetta-23-killed-30-injured/ज्ञापन में कहा गया है कि वाल्मीकि समाज लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का समर्थक और वोटर रहा है, लेकिन वर्ष 2014 से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश के वाल्मीकि सफाई कर्मियों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका है। पत्र में दावा किया गया है कि आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में सफाई कर्मी कर्ज और कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। ज्ञापन में प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में कार्यरत ठेका एवं संविदा सफाई कर्मचारियों को जल्द नियमित किया जाए। साथ ही उनके वेतन और सेवा सुरक्षा को लेकर भी ठोस निर्णय लिया जाए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बिजनौर जिले की 12 नगरपालिकाओं और 6 नगर पंचायतों के सफाई कर्मचारी सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सफाई कर्मियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो प्रदेशभर का वाल्मीकि समाज सरकार के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होगा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में उत्तर प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्यपाल, नगर विकास मंत्री तथा पुलिस अधीक्षक बिजनौर को भी भेजी गई है। ज्ञापन पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, ट्रेड यूनियन पदाधिकारियों और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं। मामले को लेकर जिले में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। वाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है कि सफाई कर्मियों को वर्षों से स्थायी नौकरी और सम्मानजनक वेतन की उम्मीद है, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। वहीं राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण विषय बन सकता है, क्योंकि नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों और उनके परिवारों की संख्या बड़ी है।