आत्मज्ञान, आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर देता है दस लक्षण पर्व -नरेंद्र जनता

टीकमगढ़। दिगंबर जैन समाज का पावन दस लक्षण महापर्व (पर्युषण पर्व) इस वर्ष 16 सितंबर से 25 सितंबर तक श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर टीकमगढ़ शहर के सभी जैन मंदिरों के साथ-साथ जिले के प्रमुख जैन तीर्थ एवं अतिशय क्षेत्रों में तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।धर्म प्रभावना समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जनता ने जानकारी देते हुए बताया कि दस लक्षण महापर्व जैन समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। यह पर्व व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर होकर अपनी आत्मा की ओर देखने, आत्मचिंतन करने तथा आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देता है। शहर के जैन मंदिरों के साथ अतिशय क्षेत्र पपौरा जी सिद्ध क्षेत्र आहार जी, नवागढ़ जी, बधा जी सहित विभिन्न जैन क्षेत्रों में भी पर्व को लेकर धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।उन्होंने बताया कि दस लक्षण पर्व आत्मचेतना, आत्मजागृति, संयम, तप, त्याग, करुणा और क्षमाभाव के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने का संदेश देता है। इन दिनों श्रद्धालु पूजा-अर्चना, अभिषेक, स्वाध्याय, सामायिक, ध्यान, उपवास, एकासन तथा विभिन्न प्रकार की तप-साधना करते हैं।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
आत्मशुद्धि और कर्म निर्जरा का पर्व
दिगंबर जैन समाज में पर्युषण पर्व को आत्मशुद्धि, संयम, तप और धर्म साधना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह केवल बाहरी उत्सव नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और कर्मों की निर्जरा करने का अवसर है। पर्व के दौरान श्रद्धालु क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों से दूर रहने तथा अहिंसा, सत्य, संयम और क्षमा को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।दस लक्षण धर्म के माध्यम से मनुष्य को क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य जैसे गुणों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा मिलती है। प्रत्येक दिन इन गुणों पर चिंतन एवं मनन कर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया जाता है।
क्षमा पर्व का विशेष संदेश
पर्युषण पर्व का सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्षमा और मैत्रीभाव है। वर्षभर में जाने-अनजाने मन, वचन अथवा कर्म से किसी को दुख पहुंचा हो तो उसके लिए क्षमा मांगना और दूसरों को भी हृदय से क्षमा करना जैन धर्म की महान परंपरा है।     यही भावना के साथ सभी जीवों से क्षमा याचना की जाती है। यह पर्व मनुष्य को अहंकार और वैरभाव छोड़कर प्रेम, करुणा और आत्मीयता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।नरेंद्र जनता ने कहा कि दस लक्षण महापर्व हमें यह संदेश देता है कि मनुष्य केवल सांसारिक सुखों के पीछे न भागे, बल्कि आत्मकल्याण और मोक्ष मार्ग की ओर भी कदम बढ़ाए। तप, संयम और त्याग के माध्यम से कर्मों की निर्जरा कर आत्मा को निर्मल बनाने का प्रयास ही इस पर्व की वास्तविक भावना है।उन्होंने समस्त दिगंबर जैन समाज से दस लक्षण महापर्व के दौरान अधिक से अधिक धार्मिक आयोजनों में सहभागिता करने, स्वाध्याय एवं तप-साधना करने तथा पर्व के आध्यात्मिक संदेश को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया।

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