नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक और चौतरफा रणनीति तैयार की है। पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह फूंकने और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए बीजेपी ने इस बार विशेष प्लान ‘वन टू वन’ड्राइंग रूम बैठकों का खाका खींचा है। इस अनूठी रणनीति के तहत बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व खुद समर्पित और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के घर तक जाएगा। पार्टी के पुराने और अनुभवी सिपाहियों को संगठन से जुड़ी अपनी बात कहने के लिए पार्टी कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने खुद इस विशेष संपर्क अभियान की कमान संभाल ली है और विभिन्न जिलों के दौरे भी शुरू कर दिए हैं। बीजेपी की रणनीति पूरे प्रदेश में करीब 10 हजार ड्राइंग रूम बैठकों के माध्यम से लगभग 60 हजार सक्रिय और पुराने कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव कायम करने की है, ताकि 2027 के चुनावी समर के लिए एक अभेद्य और अनुकूल माहौल तैयार किया जा सके। इस वृहद् अभियान के अंतर्गत प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों का सघन दौरा करेंगे और वहां के वरिष्ठ व पुराने कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। संगठन को मजबूती देने के लिए वह संवाद, संपर्क और समन्वय का मूल मंत्र लेकर आगे बढ़ रहे हैं।read more:https://khabarentertainment.in/pradhan-installed-an-inverter-for-the-convenience-of-journalists-and-was-honored-by-the-journalists/ प्रदेश अध्यक्ष आगामी तीन महीनों के भीतर जिलों में जाकर पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों, पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों और पूर्व विधायकों से उनके घर पर व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे। जिलों में आयोजित होने वाली इन ड्राइंग रूम बैठकों के जरिए बीजेपी नेतृत्व जहां एक तरफ अपने पुराने कार्यकर्ताओं का सम्मान कर उनका मनोबल ऊंचा करेगा, वहीं आगामी चुनावों को लेकर उनके बहुमूल्य सुझाव और जमीनी राय भी जानेगा। इस जमीनी कवायद के पीछे पार्टी का एक मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की गुटबाजी या असंतोष को पनपने से रोकना है। बीजेपी इस वन-टू-वन अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जिला स्तर पर सभी नेता और कार्यकर्ता पूरी तरह एकजुट होकर केवल पार्टी के चुनावी निशान पर ध्यान केंद्रित करें। बीजेपी का यह पूरा प्रयास न केवल कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए है, बल्कि बूथ स्तर पर संगठन को बेहद मजबूत बनाना है, ताकि चुनाव के समय यही समर्पित कार्यकर्ता मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक सुगमता से पहुंचा सकें और पार्टी की जीत का मार्ग प्रशस्त कर सकें।