25 सितंबर 2026 को देर शाम उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता विरोधी दल ,पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी के निधन का समाचार मिला ।भाऊक मन में ,तत्क्षण मुझे वर्ष 2007 के एक अविस्मरणीय संस्मरण की स्मृति आ गयी । जब पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर समाजवादी चंद्रशेखर के निधन से रिक्त हुई बलिया लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा था।मतदान 29 दिसंबर 2007 को चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित था । समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चंद्रशेखर के छोटे पुत्र और वर्तमान में भाजपा के राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर प्रत्याशी थे । इनका मुकाबला पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी से हो रहा था। जो बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर गोरखपुर से बलिया जाकर चुनाव लड़ रहे थे। सपा और बसपा दोनों दल इस चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर लड़ रही थी ।जहां समाजवादी पार्टी बलिया को समाजवादियों का गढ़ मानकर साईकिल चलाने के प्रयास में थी। वहीं बसपा सुपीमों मायावती इस इलाके में हाथी की दस्तक को आतुर थी । पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और समाजवादी पार्टी के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के मधुर रिश्ते जगजाहिर थे। यद्यपि चंद्रशेखर अपनी पार्टी समाजवादी जनता पार्टी [सजपा] से निर्वाचित सांसद थे। फिर भी व्यक्तिगत संबंधों के कारण दूसरी पार्टियों भी उन्हें समर्थन देती रहती थी। उनके निधन के बाद सपा ने नीरज शेखर को अपना प्रत्याशी बनाया। तत्समय प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार थी, जिसका नेतृत्व मायावती कर रही थी। सत्ता पक्ष भी चुनाव मजबूती से लड़ रहा था। उसके भी ढ़ेरों मंत्री और विधायक बलिया के गांव-गांव जनसंपर्क कर अपने प्रत्याशी को मजबूती दे रहे थे ।दिसंबर के तीसरे सप्ताह में ही समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े नेता, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव बलिया संसदीय क्षेत्र के नगरा कस्बे में अपने प्रत्याशी नीरज शेखर के समर्थन में जनसभा कर रहे थे। इसी जनसभा में चुनावी कवरेज के दौरान मेरी मुलाकात समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मंत्री , समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप हुई । वे लखनऊ विश्वविद्यालय में मेरे सहपाठी थे । राजपाल कश्यप बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भी निर्वाचित हुए । राजपाल भाई ने मुझे एक दिन फोन करके कहा कि आप बांसडीह विधानसभा में आईए । यहां पर हम सभी के नेता अखिलेश यादव जी का कार्यक्रम है। यह क्षेत्र पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी जी का है ।मैं यहां प्रभारी के तौर पर पार्टी की तरफ से नियुक्त हूँ । सौरभ भाई, आप अखिलेश यादव [भैया जी] का साक्षात्कार कर लीजिये । मैं निर्धारित तिथि पर अपने कैमरामैन आशुतोष विश्वकर्मा के साथ मधुबन ,बेल्थरा रोड ,सिकंदरपुर होते हुए मैरिटार[बांसडीह विधानसभा ] पहुंचा। अखिलेश यादव उस समय समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद थे ।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteअखिलेश यादव के काफिले में वरिष्ठ नेताओं और युवाओं की भारी भरकम फौज चल रही थी। मैरिटार गाँव में अखिलेश यादव का एक बस्ती में जलपान और जनसम्पर्क का कार्यक्रम था । वहीं मेरी मुलाक़ात अखिलेश यादव से हुई । शिष्टाचार वार्ता के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने मुझे अपने वाहन में साथ बैठा लिया। उन्होंने कहा कि रास्ते में हम साक्षात्कार भी देंगे और आप मेरे साथ मेरी पार्टी के मजबूत चुनाव अभियान को भी देखिये । उनके साथ 8 बार के विधायक रामगोविंद चौधरी,वर्तमान में घोसी के सांसद राजीव राय भी थे ।मुझे याद है कि गाड़ी की अगली सीट पर रामगोविंद चौधरी बैठे थे ।मध्य की सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव,मै और सांसद राजीव राय बैठे थे। अगली सीट पर बैठे अनुभवी नेता चौधरी लगातार चुनाव जीतने की गणित और बलिया संसदीय सीट के समीकरणों से अखिलेश यादव को परिचित कराते जा रहे थे।मैंने महसूस किया कि अखिलेश यादव उनकी बातों को तवज्जो दे रहे थे ।दिन भर की चुनावी कवरेज के बाद सायं काल रेवती नगर पंचायत ,बलिया के प्राथमिक विद्यालय पर जनसभा का आयोजन था।वहाँ मैंने अखिलेश यादव के साथ फोटो की औपचारिकता के बाद माननीयों से विदा लिया। अगले दिन अखिलेश यादव की बलिया शहर के रामलीला मैदान में साइकिल रैली थी । इस दौरान भी मेरी मुलाक़ात सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ,पूर्व मंत्री गण रामगोविंद चौधरी, ओमप्रकाश सिंह ,अंबिका चौधरी ,नारद राय एवं अन्य वरिष्ठ नेताओं से हुई। इसके बाद आजीवन मेरा संपर्क रामगोविंद चौधरी से बना रहा है। 2012 से 2017 के दौरान वे सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इसके पश्चात 2017 से 2022 तक उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के गरिमामय पद का कुशलता से निर्वहन किया।राजनीतिक व्यस्तताओं और सामाजिक सक्रियताओं के बावजूद उनका सहज व्यक्तित्व और देसी अंदाज सभी को प्रभावित करता था। वह मुझे मेरे गुरु और वरिष्ठ पत्रकार पद्मभूषण रामबहादुर राय जी के कारण विशेष स्नेह और सम्मान देते थे।वे कहते थे राय साहब, सम्पूर्ण क्रांति के नायक जयप्रकाश नारायण जी के अत्यंत करीब थे ।वे जेपी की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी रहे हैं। हम सभी आपातकाल की मुखालफत करके राजनीति में आए हैं। राय साहब हम सभी मीसा बंदियों के प्रेरणाश्रोत और आदर्श हैं ।आज रामगोविंद चौधरी हमारे मध्य नहीं है। लेकिन उनके आवास पर आगंतुकों को परोसे जाने वाली नींबू चाय और बलिया की मिठास मिश्रित भोजपुरी बोली और उनकी सहृदयता हमें सदैव उनका स्मरण कराती रहेगी।