ललितपुर- बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, ललितपुर में वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्यक्ष डॉ. मुकेश चंद की अध्यक्षता में खेत बचाओं अभियान का आयोजन विकासखंड- बिरधा के ग्राम जीरोन में किया गया। केंद्राध्यक्ष ने बताया कि भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा देशव्यापी खेत बचाओं अभियान 1 से 30 जून 2026 के मध्य चलाया जा रहा था। पौधो के लिए आवश्यक सभी 17 पोषक तत्वों जैसे नत्रजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि की संतुलित मात्रा प्रयोग के लिए डीएपी और यूरिया की कम से कम प्रयोग के साथ दूसरे स्रोत के प्रयोग करने के लिए अवगत कराया। हर किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करायें एवं जांच के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। जिस प्रकार हमारे भोजन की थाली में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है उसी प्रकार पौधों के भोजन में सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है। आवश्यकता से अधिक उर्वरकों के प्रयोग से खेती की लागत बढ़ती है। मृदा की उर्वरता स्तर में गिरावट आती है। कृषक बंधु पशुओं की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, हरी खाद, नाडेप खाद, जैव उर्वरक, एनपीके, तरल उर्वरक का भी प्रयोग करें। इसके प्रत्येक कृषक एक एकड़ खेती में प्राकृतिक खेती और जैविक खेती अपना कर कृषि की लागत कम करते हुए गुणवत्तायुक्त प्राप्त उत्पाद को परिवार साहित सेवन करने के लिए प्रेरित किया। कृषक बंधुओं को कृषि विज्ञान केन्द्र से जुड़कर लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया। डॉ. दिनेश तिवारी, विषय वस्तु विशेषज्ञ-सस्य विज्ञान/ नोडल अधिकारी- खेत बचाओं अभियान ने तकनीकी जानकारी में बताया कि जिला ललितपुर के कृषक गत वर्ष (जनवरी से दिसंबर 2025) आवश्यकता से अधिक डीएपी/टीएसपी/एमएपी का 30073 मीट्रिक टन प्रयोग किया था। मृदा में यूरिया और डीएपी की आवश्यकता से अधिक और असंतुलित प्रयोग से मृदा में पोषक तत्वों का असंतुलन, मृदा उर्वरता में क्षीणता और उर्वरक उपयोग शमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।read more:https://pahaltoday.com/retired-teachers-and-shikshamitras-honored-at-baragaon-brc/कृषक बंधु यूरिया और डीएपी की असंतुलित प्रयोग की अपेक्षा मृदा परीक्षण, फसल की आवश्यकता और वैज्ञानिक संस्तुत के आधार पर एनपीके कॉम्प्लेक्स और एसएसपी उर्वरक का संतुलित प्रयोग कर अधिक लाभ उठा सकते हैं। कृषक बंधु हरी खाद (ढैंचा), जैव उर्वरक (राइजोबियम, पीएसबी), गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद, नाडेप खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग से भी अच्छी उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कृषक बंधु पौधों को दिये जाने वाले उर्वरकों का पौधों में क्या कार्य है, इसकी जानकारी पहले करें एवं उर्वरकों का प्रयोग सही मात्रा में सही समय पर और सही तरीके से ही करें। जिससे उनके धन का उचित उपयोग होगा और मिट्टी की उर्वरता के साथ वातावरण व मिट्टी का पर्यावरण भी स्वास्थ्य रहेगा। जैविक खेती और प्राकृतिक खेती करने के लिए भी प्रेरित किया गया। इस अवसर पर डॉ. अनुज कुमार गौतम, विषय वस्तु विशेषज्ञ- पशुपालन ने कृषकों को पशुओं के गोबर, मूत्र, बिछावन और चारा अवशेष से गुणवत्तायुक्त खाद बनाकर खेत में डालने के लिए जागरूक किया गया। कार्यक्रम में अवधेश, महेश, महेंद्र, मोहन सहित 40 से अधिक कृषकों ने प्रतिभाग किया।