केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी की उपस्थिति में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के विभागाध्यक्षों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य विभाग तथा उसके विभिन्न प्रभागों एवं संगठनों द्वारा संचालित परियोजनाओं, कार्यक्रमों, योजनाओं और पहलों की समग्र प्रगति का आकलन करना था।बैठक के दौरान बाढ़ प्रबंधन प्रभाग, (एफएम विंग) फरक्का बैराज परियोजना, राष्ट्रीय जल मिशन, कमान क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण, बेसिन प्रबंधन-I एवं II, राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी, केन-बेतवा लिंक परियोजना प्राधिकरण, ब्रह्मपुत्र-बराक नदी संबंधी मामले, ब्रह्मपुत्र बोर्ड, लघु सिंचाई सांख्यिकी तथा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान ने अपनी जारी परियोजनाओं और कार्यकलापों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।बैठक में बाढ़ प्रबंधन एवं सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाओं की प्रगति, फरक्का बैराज परियोजना के तहत बैराज के गेट बदलने और कटाव-रोधी उपायों सहित प्रमुख कार्यों की प्रगति तथा उनके क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई।read more:https://pahaltoday.com/woman-posing-as-a-bride-flees-after-administering-a-sedative-remains-at-large-even-after-a-month-and-a-half/इसके अलावा, राष्ट्रीय जल मिशन की प्राथमिक कार्यकलापों एवं पहलों, कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन का आधुनिकीकरण के अंतर्गत 35 पायलट क्लस्टरों के क्रियान्वयन की स्थिति तथा केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत लिंक नहर और दौधन बांध की स्थिति की समीक्षा की गई। ब्रह्मपुत्र बोर्ड द्वारा मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रगति, लघु सिंचाई सांख्यिकी कार्यक्रम के अंतर्गत जारी चार जनगणनाओं की प्रगति तथा राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान के प्रमुख कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के लक्ष्यों और प्रगति पर भी विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा उन्हें निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए राज्यों के साथ समन्वय सुदृढ करने के उद्देश्य से आवश्यक निर्देश दिए और निर्णय लिए।श्री पाटिल ने परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल देते हुए निर्देश दिया कि परियोजनाओं की प्रगति में बाधा डालने वाले कारकों की पहचान कर उनका शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके। उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा संबंधित प्रभागों और संगठनों के प्रमुखों से समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों पर प्रभावी अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने और उनके क्रियान्वयन की करीबी निगरानी बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने पर विशेष ध्यान देने पर भी बल दिया।