नई दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में “ब्रिक्स 2026 और उभरती वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में भारत की भूमिका” विषय पर सातवें साप्ताहिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्पेशल सेंटर फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमित सिंह ने विद्यार्थियों को समकालीन वैश्विक राजनीति, भारत की विदेश नीति और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, दिल्ली विश्वविद्यालय के ओएसडी डॉ. संजय वर्मा की उपस्थिति में आयोजित हुआ। उन्होंने व्याख्यान के लिए आमंत्रित विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह का अभिनंदन एवं सम्मान किया। अपने संबोधन में डॉ. अमित सिंह ने अपने संबोधन भारत की बदलती भू-राजनीतिक स्थिति और विभिन्न देशों के साथ उसके विकसित होते संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय संबंध तेजी से बदल रहे है और वैश्विक स्तर पर बहुध्रुवीय व्यवस्था का महत्व लगातार बढ़ रहा है।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/उन्होंने भारत की विदेश नीति के संदर्भ में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा को भी रेखांकित किया, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की भारतीय दृष्टि को प्रस्तुत करती है व्याख्यान के दौरान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली घोषणा पर भी विशेष चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने बताया कि बदलती वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों को वैश्विक शक्ति-संतुलन, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और उभरती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका को व्यापक भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने भू-राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, ब्रिक्स तथा वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका से जुड़े विभिन्न प्रश्न विशेषज्ञ के समक्ष रखे। डॉ. अमित सिंह ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए विषय के विभिन्न पक्षों को स्पष्ट किया। इस साप्ताहिक व्याख्यान ने विद्यार्थियों को समकालीन वैश्विक घटनाक्रम को एक पत्रकार की दृष्टि से समझने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों में तथ्यात्मक समझ, संदर्भों का विश्लेषण, आलोचनात्मक सोच और संतुलित दृष्टिकोण का होना आवश्यक है। व्याख्यान ने विद्यार्थियों को वैश्विक घटनाओं को केवल समाचार के रूप में देखने के बजाय उनके राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों को समझने के लिए प्रेरित किया।