त्याग ही जीवन का सुख और राग दुख का कारण

ललितपुर। जैन अटा मंदिर में पर्युषण पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के प्रभावक शिष्य मुनि विशद सागर महाराज ने कहा त्याग के माध्यम से जीवन की उन्नति का मार्गप्रशस्त होता है।  जैसे जैसे वस्तु का त्याग करते जाते हैं वैसे वैसे जीवन की उन्नति होती चली जाती है। त्याग में सुख है राग में दुख इसलिए हमें त्याग धर्म को स्वीकारना चाहिए। पर पदार्थ को पूर्ण रूप से त्यागना ही सबसे बडा दान बत्ताते हुए कहा इसे यथा समय करते रहना चाहिए। मुनि श्री ने त्याग को मुक्ति का द्वार बताते हुए कहा कुछ समय का त्याग भी आपको मुक्ति प्रदान कराने में सहयोगी होता है। उन्होने कहा त्याग के दिन पूजा अनुष्ठान का जो अवसर मिल रहा है इसे आप लोग मोह राग द्वेष का त्याग कर प्रभु की भक्ति कर रहे हैं यह त्याग आपको महान बनाएगा। धर्म सभा के प्रारम्भ में तत्वार्थसूत्र का वाचन पाठशाला परिवार की अन्या जैन,हर्षित जैन‌, भव्य जैन द्वारा किया गया जिसमें अर्घ जिनशासन एकता महिला मण्डल द्वारा समर्पित किए गए।
read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteजबकि मंगलाचरण प्रिया सिंघई ने किया। मध्यान्ह में तत्वार्थ सूत्र को आचार्य श्री ने श्रावकों को विस्तार से समझाया।नगर में जैन मंदिरों में श्रद्धालुजनों द्वारा प्रातःकाल से ही पूजन अर्चन विधान और श्री जी के अभिषेक शान्तिधारा में सम्मलित होकर पुर्याजन कर रहे हैं। मध्यान्ह में जैन मंदिरों में समोवशरण विधान, पंचकल्याणक विधान, पंच परमेष्ठी विधान, कर्मदहन विधान, नवग्रह पूजन विधान, व्रत उद्यापन आदि में सम्मलित होकर पुण्यर्थ्यांजन कर रहे हैं। जैन मंदिरों में सुन्दर सुन्दर झाकियों की रचनाए बच्चों की टोलियों द्वारा की जिसको धर्मालुजन प्रोत्साहित कर रहे हैं। सार्यकाल आरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की जा रही है नगर के अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्रपाल मंदिर में सुधाकलश महिला मण्डल द्वारा कुण्डलपुर की गौरवगाथा का मंचन किया गया जिसमें कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस मौके पर जैन पंचायत के अध्यक्ष डा० अक्षय टड़या, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, सीए सौरभ जैन, प्रबंधक मोदी पंकज जैन अशोक दैलवारा, प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिकू, पुष्पेन्द्र जैन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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