भारत-यूके सीईटीए: हरियाणा के युवाओं, किसानों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेश व नई तकनीकों से जोड़ेगा

नई दिल्ली ,। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारत-यूके सीईटीए हरियाणा के लिए वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोलने वाला महत्वपूर्ण समझौता है। इससे राज्य के टेक्सटाइल, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को यूके के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। यह समझौता हरियाणा के युवाओं, किसानों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों और नई तकनीकों से जोड़कर विकास के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सोमवार को गुरुग्राम स्थित यूनिवर्सिटी में ‘हरियाणा-यूके सीईटीए ट्रेड ब्रिज : अनलॉकिंग ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज फॉर हरियाणा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन यूके हाई कमीशन के सहयोग से किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने विदेश समन्वय विभाग का लोगो भी लॉन्च किया। उन्होंने यूके से आए ब्रिटिश हाई कमीशन के प्रतिनिधियों, विदेशी मित्रों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों और अन्य साझेदारों का हरियाणा की कर्मभूमि पर स्वागत किया।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और यूके के संबंध वर्षों पुरानी साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और मजबूत जन-से-जन संपर्क पर आधारित हैं। हजारों हरियाणवी परिवारों सहित लाखों प्रवासी भारतीयों ने यूके के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वहीं ब्रिटिश संस्थानों ने भी हरियाणा की विकास यात्रा में विश्वसनीय साझेदार की भूमिका निभाई है।

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2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा हरियाणा

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य बन चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 में भारत की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे और उसी समय भारत-यूके संबंधों के भी 100 वर्ष पूरे हो रहे होंगे। इसी राष्ट्रीय संकल्प के साथ हरियाणा ने देश की अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने का ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया है।उन्होंने कहा कि आगामी 1 नवंबर को हरियाणा अपनी स्थापना के 60 गौरवशाली वर्ष पूरे करने जा रहा है। ये छह दशक किसानों की मेहनत, श्रमिकों के पसीने और उद्यमियों की दूरदर्शिता के साक्षी हैं।

2016 की सफलता के बाद 2027 में फिर होगा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी ऐतिहासिक पड़ाव पर अगले वर्ष 5 से 7 अप्रैल, 2027 तक ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027’ का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले वर्ष 2016 में आयोजित समिट में 6 लाख 41 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे।उन्होंने बताया कि गत 23 और 24 अगस्त को मुंबई से ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अंतरराष्ट्रीय आउटरीच कैंपेन की शुरुआत की गई। मुंबई में 17 कंपनियों के साथ 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हुए। इस दौरान 200 से अधिक प्रमुख बिजनेस लीडर्स, उद्यमियों और हरियाणवी डायस्पोरा सदस्यों के साथ संवाद हुआ।मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के प्रचार-प्रसार के लिए देश के सात प्रमुख शहरों और जापान, दक्षिण कोरिया, दावोस, जर्मनी, यूके, ब्राजील, चिली और दुबई जैसे विश्व के नौ प्रमुख आर्थिक केंद्रों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे।

भविष्य के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 10 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एग्रीबिजनेस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे भविष्य के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने हाल ही में 10 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां लागू की हैं।राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना और 10 लाख से अधिक रोजगार सृजित करना है। इन नीतियों के शुरूआत के पहले ही दिन 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के 110 एमओयू हुए, जिनमें 24 हजार 350 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश शामिल है।

एमएसएमई और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने एमएसएमई और निर्यात क्षेत्र के लिए 60 परिवर्तनकारी पहल की हैं। फरवरी 2019 में पहली एमएसएमई नीति लागू किए जाने के बाद राज्य में 15 लाख से अधिक एमएसएमई का औपचारिक पंजीकरण हुआ है।अब ‘हरियाणा प्रोग्रेसिव एमएसएमई एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026’ लाई गई है। इसके तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने, 5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित करने और राज्य के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के मात्र 2 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में होने के बावजूद हरियाणा देश की सबसे गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव सेक्टर से लेकर टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कृषि तक राज्य ने नए आयाम स्थापित किए हैं। गुरुग्राम आज भारत के प्रमुख व्यावसायिक, तकनीकी और वैश्विक सेवा केंद्रों में शामिल है।उन्होंने कहा कि यह बदलाव संयोग नहीं है, बल्कि वर्ष 2014 से उद्योग जगत के साथ निरंतर सीधे संवाद, किसानों की मेहनत, युवाओं की ऊर्जा और निवेशकों के अटूट विश्वास का परिणाम है।

‘गो ग्लोबल’ विजन के तहत विदेश सहयोग विभाग निभा रहा अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक सप्लाई चेन के पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए हरियाणा ने ‘गो ग्लोबल’ का दूरदर्शी विजन अपनाया है। भारत-यूके सीईटीए इस दिशा में एक मील का पत्थर है।उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश और व्यापार को गति देने तथा भारत-यूके सीईटीए जैसे समझौतों को सुचारू रूप से लागू करने के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2020 में विदेश सहयोग विभाग का गठन किया था। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी वैश्विक साझेदारों से इस विभाग का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह विभाग हरियाणा में व्यापार के विस्तार से जुड़ी आवश्यकताओं के समाधान में सहयोग करेगा।

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