श्रावणी उपाकर्म स्नान में उमड़ी आस्था, गूंजे वेद मंत्र।

महराजगंज:आनन्दनगर स्थित दुर्गा मंदिर मान सरोवर में रविवार को विप्र बंधुओ द्वारा किया गया श्रावणी उपाकर्म। धार्मिक कार्यक्रम श्रीहरि गुरु कृपा वर्ष 1979 से लगातार आयोजित किया जा रहा है।  प्रेरणास्रोत: गोलोकवासी पं. मथुरा मणि त्रिपाठी, गोलोकवासी रामकृष्ण जी महाराज। श्रावणी स्नान हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व रखने वाला स्नान कर्म है। श्रावन मास में श्रद्धालु पवित्र नदियों, सरोवरों तथा तीर्थस्थलों पर स्नान कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। श्रावणी उपाकर्म में दशविधि स्नान का विशेष महत्त्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार विभिन्न पवित्र द्रव्यों से स्नान करने के बाद ऋषियों का स्मरण एवं तर्पण किया गया। यज्ञोपवीत परिवर्तन की परंपरा भी निभाई गयी।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette धार्मिक मान्यता के अनुसार यह कर्म आत्मशुद्धि, संयम और वेदाध्ययन के संकल्प से जुड़ा हुआ है। ब्राह्मणों ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना, जप और दान-पुण्य किया। मंदिर पर भक्तिमय वातावरण बना रहा। आचार्य ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं, संस्कारों और आध्यात्मिक अनुशासन को आगे बढ़ाने का अवसर भी है। श्रावणी स्नान पर्व में कपिल देव मणि त्रिपाठी, अर्जुन प्रसाद मिश्र, राजेश्वर मिश्र, अनिल द्विवेदी, राकेश मणि त्रिपाठी, हरिकृष्ण मणि त्रिपाठी, अनिल पांडेय, मनोज मिश्र,  प्रवीण मणि त्रिपाठी, राजीव चौबे, जगदम्बा उपाध्याय, अखिलेश, दिवाकर उपाध्याय, आनंद मिश्र, सर्वदानंद मिश्र, अभिषेक मिश्र, राघवेन्द्र मिश्र व अन्य ब्राह्मणों ने स्नान कर पुण्य प्राप्त किया।

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