बहराइच ( मिहीपुरवा )lकतर्नियाघाट। ककराहा रेंज के ग्राम पंचायत महबूबनगर में एक सितंबर को जंगल की सीमा से करीब 200 मीटर दूर 28 वर्षीय राम सिंह की वन्यजीव के हमले में हुई मौत के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर घटना में शामिल व्यस्क नर तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। तेंदुए के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र में दहशत के बीच ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद कर स्थिति को नियंत्रित किया और मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उप-क्षेत्रीय वनाधिकारी (डिप्टी रेंजर) सत्यप्रकाश वर्मा ने घटनास्थल और पीड़ित के आंगन में मिले पगमार्क का वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया। पगमार्क के माप से हमलावर के व्यस्क तेंदुआ होने की पुष्टि हुई।इसके बाद लगातार हो रही बारिश के बीच वन विभाग की मैदानी टीम ने घटना स्थल के पास रणनीतिक स्थान पर पिंजरा लगाया। 24 घंटे से भी कम समय में पगमार्क के वैज्ञानिक आकलन से मेल खाता व्यस्क नर तेंदुआ पिंजरे में सुरक्षित कैद हो गया। तेंदुए को गांव से सुरक्षित बाहर निकालकर पशुचिकित्सकीय परीक्षण के लिए भेजा गया है। वर्तमान में उसका स्वास्थ्य परीक्षण और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत निरीक्षण किया जा रहा है।
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टीम की तत्परता से सफल हुआ रेस्क्यू
रेस्क्यू अभियान में उप-क्षेत्रीय वनाधिकारी सत्यप्रकाश वर्मा, वन दरोगा रविंद्र राव, वन रक्षक कपिल कुमार सहित पूरी मैदानी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टीम ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझाने, प्रतिकूल मौसम में पिंजरा स्थापित करने और तेंदुए को सुरक्षित बाहर निकालने में संयम एवं साहस का परिचय दिया। पूरे अभियान का रणनीतिक पर्यवेक्षण क्षेत्रीय वनाधिकारी (RO) के के सिंह ककराहा के नेतृत्व में किया गया।
ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
वन विभाग ने जंगल से सटे गांवों के ग्रामीणों से रात में खुले आंगन या बरामदे में नहीं सोने, घरों के आसपास पर्याप्त रोशनी रखने तथा सुबह-शाम और रात में जंगल की सीमा, खेतों या घनी झाड़ियों के पास अकेले न जाने की अपील की है। बच्चों पर विशेष नजर रखने और मवेशियों को रात में सुरक्षित एवं मजबूत बाड़ों में रखने की सलाह दी गई है।ग्रामीणों से घरों के आसपास घनी झाड़ियों व खरपतवार की नियमित सफाई करने तथा वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी वनकर्मी या रेंज कार्यालय को सूचना देने को कहा गया है। वन विभाग के अनुसार मानव जीवन की क्षति अपूरणीय है, लेकिन त्वरित वैज्ञानिक प्रतिक्रिया और सामुदायिक समन्वय के माध्यम से घटना के बाद 24 घंटे के भीतर तेंदुए का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।