कजरी महोत्सव में लोकगीतों की बही रसधार, बालचरन यादव समेत कलाकारों ने बांधा समां

गाजीपुर। विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी “मंगल मैत्री सेवा मंडल” के तत्वावधान में रविवार, 30 अगस्त 2026 को भव्य कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूर्वांचल की लोक संस्कृति और कजरी गायन की परंपरा जीवंत हो उठी। विभिन्न क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से देर तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किए रखा।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में चंदौली से पहुंचे बिरहा सम्राट एवं लोक गायक बालचरन यादव ने कहा कि कजरी हमारे देश की एक अद्भुत और समृद्ध लोक विधा है। धान की रोपाई के दौरान ग्रामीण महिलाएं कजरी गीत गाकर श्रम को आनंद में बदल देती हैं। वहीं सावन के झूलों पर कजरी गायन की परंपरा लोगों को उल्लास और उमंग से भर देती है। उन्होंने कहा कि लोकगीत हमारी मिट्टी, परंपरा और संस्कृति की पहचान हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।महोत्सव में यूपी-बिहार सीमा क्षेत्र से पहुंचीं लोक गायिका नेहा सोनाली ने “पिया मेहंदी लियादा मोती झील से, जाके साइकिल से ना…” प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/ वहीं गाजीपुर-बलिया सीमा क्षेत्र से आईं लोक गायिका सुनीता मौर्य ने “हरे रामा रिमझिम बरसे सवनवा, मगन भईले मनवा ए हरि…” सुनाकर वातावरण को सावनमय कर दिया।स्थानीय क्षेत्र की लोकप्रिय गायिका आंचल तारा ने “कजरी के दिनवा में बजरी बोवईबै हो रामा, सैंया से चिरई हकईबै सांवरिया…” की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।मुख्य अतिथि बालचरन यादव ने अपनी लोकप्रिय शैली में “श्याम वृंदावन में रास को रचाय रहे, बसिया बजाय रहे ना…” प्रस्तुत किया तो श्रोता झूम उठे और पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।कजरी महोत्सव में लोक गायक सुदामा भारती, श्रीराम यादव, राकेश यादव, सुरेंद्र यादव, रामाश्रय यादव, डॉ. अवधेश भारती, कुंवर विजय यादव सहित अन्य कलाकारों ने भी कजरी की शानदार प्रस्तुतियां देकर लोक संस्कृति की छटा बिखेरी।कार्यक्रम में चंद्रहास यादव चंदौली एवं सतीश यादव चंदौली विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता रामराज कवि ने की।अंत में कार्यक्रम के आयोजक सूबेदार स्नेही ने संचालन करते हुए सभी आगंतुक अतिथियों, कलाकारों एवं कवियों को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन लोक संस्कृति और लोक कलाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इस अवसर पर डॉ. संतलाल, मोनू जायसवाल, गुड्डू यादव, अमिंदर, झुग्गी लाल, जहीर खान, मूलचंद राम, चंद्रमा राम सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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