नई दिल्ली, यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (डूटा) ने दिल्ली सरकार के पैसों से चलने वाले 12 कॉलेजों के शिक्षकों के लिए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है। इन कॉलेजों में जो शिक्षक सालों से अस्थायी या अनौपचारिक रूप में काम कर रहे है, उन्हें नियमित कराने के लिए उपराज्यपाल से तुरंत कदम उठाने की मांग की गई है।इन कॉलेजों में कई शिक्षक ऐसे है जो पिछले 5 से 20 साल या उससे भी ज्यादा समय से लगातार पढ़ा रहे है। इसके बावजूद उन्हें हर 120 दिन पर नौकरी से हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया झेलनी पड़ती है और कई जरूरी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/हाल यह है कि इन कॉलेजों में आधे से ज्यादा शिक्षक अभी भी अनौपचारिक या गेस्ट के तौर पर काम कर रहे है।डूटा का कहना है कि शिक्षकों के इस तरह अस्थाई रहने से पढ़ाई की गुणवत्ता और कॉलेजों के काम पर बुरा असर पड़ता है। यह नई शिक्षा नीति 2020 के उस नियम के भी खिलाफ है जो यह कहता है कि शिक्षक पूरी तरह प्रेरित और सुरक्षित महसूस करने चाहिए।इसलिए, डूटा ने उपराज्यपाल से अपील की है कि वे इन 12 कॉलेजों के सभी योग्य और पुराने शिक्षकों को समय पर नियमित करवाएं और नियमों के मुताबिक सभी जरूरी आरक्षण का पूरा ध्यान रखे।डूटा ने यूनिवर्सिटी के सभी शिक्षकों और संगठनों से अपील की है कि वे शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की इस लड़ाई में आगे आएं, इस याचिका पर ज्यादा से ज्यादा साइन करें और इसे दूसरों तक भी पहुंचाएं।