‘कुर्सी नहीं, तो ट्रेन भी आगे नहीं जाएगी…’ गार्ड की जिद से थमे वैशाली एक्सप्रेस के पहिए, रेलवे महकमे में हड़कंप

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन से एक बेहद ही हैरान कर देने वाला और अजब-गजब मामला सामने आया है। यहां एक छोटी सी मांग पूरी न होने पर एक महत्वपूर्ण और वीआईपी ट्रेन के पहिए अचानक थम गए।नई दिल्ली से ललितग्राम जा रही वैशाली एक्सप्रेस के गार्ड को जब बैठने के लिए सही कुर्सी नहीं मिली, तो वह इस कदर नाराज हुआ कि उसने ट्रेन को आगे ले जाने से ही साफ इनकार कर दिया। गार्ड की इस जिद से रेलवे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए और स्टेशन पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। काफी मानमनौव्वल के बाद जाकर ट्रेन आगे के सफर के लिए रवाना हो सकी।read more:https://pahaltoday.com/cmo-saved-the-lives-of-passengers-injured-in-a-road-accident/

टूटी कुर्सी देख भड़का गार्डड्यूटी करने से किया इनकार
जानकारी के मुताबिक, 18 अगस्त की सुबह नई दिल्ली-ललितग्राम वैशाली एक्सप्रेस (15566) सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर पहुंची थी। यहां से ट्रेन को आगे ले जाने के लिए गार्ड रामाशीष दास को चार्ज लेना था।लेकिन जब वह गार्ड यान (केबिन) में पहुंचे, तो वहां बैठने वाली कुर्सी टूटी हुई थी। यह देखकर रामाशीष दास भड़क गए और उन्होंने टूटी कुर्सी के सहारे या खड़े होकर ड्यूटी करने से मना कर दिया, जिससे पूरी ट्रेन स्टेशन पर ही खड़ी रह गई।

टूल बॉक्स नहीं होने से गहराया विवाद
बताया जा रहा है कि जो गार्ड लखनऊ से गोरखपुर तक की ड्यूटी करके आए थे, उन्होंने अपने टूल बॉक्स पर बैठकर ही जैसे-तैसे सफर पूरा किया था। लेकिन गोरखपुर से बरौनी के लिए जो चार्ज रामाशीष दास ले रहे थे, उनके पास टूल बॉक्स की जगह ट्रॉली बैग था, जिस पर बैठना मुमकिन नहीं था।स्टेशन प्रबंधन की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने खड़े होकर सफर करने से सख्त ऐतराज जताया और स्टेशन अधीक्षक को एक लिखित मेमो भेज दिया। मेमो में स्पष्ट लिखा गया कि वह बिना कुर्सी के ट्रेन लेकर किसी भी सूरत में नहीं जाएंगे।

आश्वासन के बाद 38 मिनट की देरी से चली ट्रेन
गार्ड के इस सख्त रवैये के बाद रेल अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में रेलवे के आला अधिकारियों ने गार्ड को समझाना शुरू किया।काफी मशक्कत और आगे के स्टेशन पर बैठने की उचित व्यवस्था कराने के पक्के आश्वासन के बाद गार्ड रामाशीष दास ट्रेन ले जाने को राजी हुए। इस पूरे हंगामे के चलते वैशाली एक्सप्रेस करीब 38 मिनट की देरी से गोरखपुर से रवाना हो सकी। बाद में देवरिया रेलवे स्टेशन पहुंचने पर जुगाड़ के तौर पर उनके लिए एक छोटी टेबल की व्यवस्था की गई।

रेलवे ने दी सफाईसख्त कार्रवाई की तैयारी
इस अजब-गजब घटनाक्रम पर पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सुमित कुमार ने अपनी सफाई दी है। उन्होंने बताया कि वैशाली एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेलवे (ECR) की ट्रेन है और गोरखपुर से यह सिर्फ पास होकर गुजरती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गार्ड यान में इनबिल्ट (पहले से फिक्स) कुर्सी होती है और इसके लिए अलग से कोई स्टूल देने का नियम नहीं है। दिल्ली से आने तक किसी ने इस पर कोई आपत्ति भी नहीं जताई थी।फिलहाल, इस पूरे विवाद को लेकर लखनऊ मंडल ने आधिकारिक कार्रवाई के लिए सोनपुर मंडल को पत्र भेज दिया है।

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