बड़हलगंज। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की 119वीं जयंती शुक्रवार को उनके वंशजों, ग्रामीणों और काशी से आए विद्वानों के नेतृत्व में ओझवली स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर धूमधाम से मनाई गई।कार्यक्रम में शिक्षक नेता ने स्वामी करपात्री जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका मूल नाम हरि नारायण ओझा था। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने गृहत्याग कर संन्यास की दीक्षा ली और बाद में हरिहरानंद सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हुए।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteअंजुली को भोजन पात्र के रूप में प्रयोग करने के कारण उन्हें ‘करपात्री’ नाम मिला। धर्मशास्त्रों के अद्वितीय ज्ञान के कारण उन्हें ‘धर्मसम्राट’ की उपाधि दी गई।उन्होंने बताया कि स्वामी जी की स्मरण शक्ति अद्भुत थी और उन्हें वरदान प्राप्त था कि स्वप्न में भी उनकी वाणी शास्त्र विरुद्ध नहीं होगी। उन्होंने अखिल भारतीय राम राज्य परिषद की स्थापना भी की थी। इस अवसर पर अश्वनी ओझा, शिवानंद ओझा, पूर्व प्रधान अरुण ओझा, आनंद शुक्ला, परशुराम शुक्ल, प्रांजल ओझा, वेदप्रकाश ओझा, सुजीत प्रजापति, चंदन विश्वकर्मा और पवन ओझा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।