चातुर्मास महानुष्ठान में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज रहा सिद्धपीठ हथियाराम

जखनियां/गाजीपुर। सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर एवं जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज इन दिनों सिद्धपीठ पर पावन चातुर्मास महानुष्ठान संपादित कर रहे हैं। श्रावण प्रतिपदा से शुरू हुआ यह महानुष्ठान भाद्रपद पूर्णिमा तक अनवरत चलेगा। धार्मिक आयोजन को लेकर सिद्धपीठ के शिष्यों एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। प्रतिदिन दर्शन-पूजन के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।21 वैदिक विद्वानों की देखरेख में हो रहा अनुष्ठानचातुर्मास महानुष्ठान को पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से संपन्न कराने के लिए वाराणसी के विद्वान आचार्य जुटे हुए हैं। वैदिक ब्राह्मण आचार्य सुरेश त्रिपाठी, आचार्य संजय पाण्डेय, प्रवीण त्रिपाठी, कृष्णकांत पाण्डेय और लक्ष्मीकांत त्रिपाठी सहित 21 विद्वान ब्राह्मण प्रतिदिन विशेष आरती, पूजन एवं अनुष्ठान संपन्न करा रहे हैं। सुबह से शाम तक चल रहे वैदिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार से पूरा सिद्धपीठ परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर है।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/12 ज्योतिर्लिंगों और नेपाल के पशुपतिनाथ में कर चुके हैं चातुर्माससिद्धपीठ हथियाराम मठ के 26वें पीठाधीश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति महाराज ने पीठ की गद्दी पर आसीन होने के बाद अपने गुरुजनों की परंपरा का अनुसरण करते हुए चातुर्मास अनुष्ठान का संकल्प लिया। अपनी साधना यात्रा के दौरान वह देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों तथा नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में प्रवास कर चातुर्मास महायज्ञ संपन्न कर चुके हैं।आहार, विहार और विचार के परिष्करण का समय है चातुर्मासचातुर्मास के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास सनातन वैदिक धर्म में आहार, विहार और विचार के परिष्करण का समय है। यह व्यक्ति को संयम और सहिष्णुता की साधना के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में तप, शास्त्र अध्ययन और सत्संग का विशेष महत्व है। चातुर्मास के नियम सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक दृष्टि से भी उपयोगी हैं। इसके माध्यम से व्यक्ति स्वयं में सुधार लाने के साथ दूसरों के अस्तित्व को स्वीकार करने और उनके प्रति सम्मान का भाव विकसित करता है।

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