नई दिल्ली, 5 अगस्त। शोध फाउंडेशन द्वारा राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा जागरूकता मिशन (NIPAM), सेंटर फॉर इनोवेशन इन इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च, एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (CIIDRET), दिल्ली विश्वविद्यालय दक्षिण परिसर, रामजस कॉलेज, शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज़ फॉर वूमेन तथा आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित ‘अन्वेषण 2.0’ छह सप्ताहीय ग्रीष्मकालीन विज्ञान इंटर्नशिप कार्यक्रम का समापन बुधवार को रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित भव्य समापन समारोह के साथ हुआ। इस कार्यक्रम के अंतर्गत दिल्ली, वाराणसी, हैदराबाद और शिमला से चयनित 170 स्नातक विज्ञान विद्यार्थियों ने छह सप्ताह तक प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा अंतर्विषयी अध्ययन के माध्यम से शोध का अनुभव प्राप्त किया।समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली सरकार के गृह एवं शिक्षा मंत्री श्री आशीष सूद ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य शिक्षा को रटने की प्रवृत्ति से निकालकर आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार और कौशल-आधारित अधिगम की दिशा में ले जाना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन तथा प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना भारत में शोध संस्कृति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकारी विद्यालयों में लगभग 9,000 स्मार्ट बोर्ड, 100 से अधिक भाषा कार्यक्रम तथा 175 से अधिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं, जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है।विशिष्ट अतिथि एवं सामाजिक चिंतक श्री आशीष चौहान ने कहा कि वर्ष 2025 में केवल दिल्ली से 50 विद्यार्थियों के साथ प्रारंभ हुआ अन्वेषण कार्यक्रम आज विस्तारित होकर दिल्ली, वाराणसी, हैदराबाद और शिमला सहित चार शहरों में 170 विद्यार्थियों तक पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम स्नातक स्तर के विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित शोध संस्थानों और प्रयोगशालाओं से जोड़कर उन्हें प्रारंभिक अवस्था में ही शोध के प्रति प्रेरित करता है। उन्होंने भारत में अनुसंधान एवं विकास पर अधिक निवेश की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि देश को वैश्विक स्तर पर अपने शोध की गुणवत्ता और प्रभाव को और अधिक सशक्त बनाना होगा।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के स्टेम सेल फेसेलिटी की प्रोफेसर प्रो. सुजाता मोहंती ने अपने प्रेरक व्याख्यान में बताया कि कुष्ठ रोगियों की पीड़ा को निकट से देखने के अनुभव ने उन्हें चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।read more:https://pahaltoday.com/protest-by-the-all-gondwana-students-association-and-the-gond-community/उन्होंने स्टेम सेल को सरल भाषा में “मदर सेल” के रूप में समझाते हुए महाभारत के 101 कौरवों का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी बताया कि प्लेसेंटा की एम्नियोटिक झिल्ली स्टेम सेल का समृद्ध स्रोत है, जिसका उपयोग पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिसे सामान्यतः चिकित्सा अपशिष्ट माना जाता है, वही भविष्य में उपचार की महत्वपूर्ण संभावना बन सकता है।इससे पूर्व रामजस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अजय अरोड़ा ने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने शोध फाउंडेशन और सहयोगी संस्थानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम स्नातक स्तर पर शोध संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपने शैक्षणिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।छह सप्ताह तक चले इस इंटर्नशिप कार्यक्रम में प्रतिभागियों को देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन, आधुनिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा अंतर्विषयी शोध का अनुभव प्राप्त हुआ। “6 Weeks to 6 Years” की अवधारणा पर आधारित इस पहल का उद्देश्य स्नातक स्तर के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना तथा उन्हें दीर्घकालिक शोध करियर के लिए प्रेरित करना है।शोध फाउंडेशन ने अपने संबोधन में कहा कि संस्था का उद्देश्य शोध-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना, नवाचार और विश्लेषणात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करना, भावी शोधकर्ताओं का निर्माण करना तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना है। अन्वेषण जैसी पहलें भारत में अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने तथा युवा प्रतिभाओं को विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।समारोह का समापन प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों, मार्गदर्शकों एवं सहयोगी संस्थानों के सम्मान के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि अन्वेषण 2.0 से प्राप्त अनुभव प्रतिभागियों को भविष्य में उच्चस्तरीय अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगा तथा वे विज्ञान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।