*61 साल की उम्र में अखिल भारतीय बार परीक्षा पास कर शिवमंगल सिंह आईपी बने आजीवन अधिवक्ता, कायम किया रिकॉर्ड*

  हरिकृष्ण कश्यप कानपुर देहात हो इरादे बुलंद तो मंजिलें कदम चूमती हैं, इस कहावत को यथार्थ करने वाले गैर राजनीतिक, देशव्यापी, देश के कई महामहिमों द्वारा सराहनीय “ऑपरेशन विजय” (बुराइयों के खिलाफ जंग) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवमंगल सिंह आईपी, जिन्होंने पहले 1986 से लेकर 2008 तक भारतीय सेना में अपनी ऐतिहासिक सेवाएं दीं, जिस पर उन्हें भारतीय सेना द्वारा कई मेडलों से सम्मानित किया गया। जहां उन्हें सबसे बड़ी प्रेरणा ऑपरेशन विजय कारगिल से मिली, जिसमें भारतीय सेना ने विषम परिस्थितियों में दुश्मन को खदेड़ कर भारत की सीमाएं सुरक्षित की थीं।उसके बाद उन्होंने भारतीय सेना से स्वेच्छा पूर्वक विदाई लेकर 2008 से अपने जीवन की दूसरी अवस्था में प्रवेश कर समाज में व्याप्त सामाजिक बुराइयों को ऑपरेशन विजय कारगिल की तरह ही समाज से बाहर निकालने हेतु गैर राजनीतिक, ऑपरेशन विजय बुराइयों के खिलाफ जंग की स्थापना कर संघर्ष शुरू किया जो आज तक जारी है। जिसमें उनकी सराहना भारत के कई महामहिमों एवं देश स्तरीय हस्तियों द्वारा की जा चुकी है। उसी क्रम में उन्होंने समाज के लिए कानून की शिक्षा अति अनिवार्य मानते हुए स्नातक होने के बावजूद बीएएलएलबी करने हेतु 2019 में रामा यूनिवर्सिटी ज्वाइन की। जिसमें लगातार 10 सेमेस्टर उच्च अंकों के साथ पास करते हुए 2025 में प्रथम श्रेणी के तहत बीएएलएलबी की उपाधि हासिल की। उसी के तहत उनका उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन हुआ और वह एडवोकेट बन गए।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/ इसके बाद आजीवन एडवोकेट बनने हेतु उन्हें अखिल भारतीय बार परीक्षा पास करना अनिवार्य था। जिसके तहत उन्होंने 2026 में अखिल भारतीय बार परीक्षा दी, जिसमें पास कर जहां आजीवन अधिवक्ता बने, वहीं उन्होंने कानून क्षेत्र में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाकर समाज को यह संदेश भी दिया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और वर्तमान समय में देश के प्रत्येक व्यक्ति को कानून की शिक्षा अनिवार्य है, क्योंकि कानून किसी को यह कहने पर माफ नहीं करता कि हमें इसकी जानकारी नहीं थी।उपरोक्त जानकारी देते हुए ऑपरेशन विजय बुराइयों के खिलाफ जंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं क्रांतिकारी एडवोकेट शिवमंगल सिंह ने कहा कि 61 साल की उम्र में आजीवन अधिवक्ता बनने तक का हमारा उद्देश्य समाज को शिक्षा एवं कानून क्षेत्र में अहम संदेश देने के साथ-साथ समाज के पीड़ितों और न्याय से वंचितों को निशुल्क न्याय दिलाना है, जिसके लिए वह अपने इस तीसरे अवस्था का अधिक से अधिक समय समाज को देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *