बाराबंकी। कहते हैं राजनीति जनता की नब्ज़ पहचानती है। लेकिन बाराबंकी में इन दिनों लोग पूछ रहे हैं। क्या राजनीति अब दर्द नहीं, सिर्फ़ मुद्दे पहचानती है? जनपद में वर्षों से लगभग 5,000 औकाफ़ संपत्तियों पर कथित अवैध कब्ज़ों, कब्रिस्तानों और करबला की ज़मीनों को लेकर सवाल उठते रहे। अदालतों के दरवाज़े खटखटाए गए, सामाजिक संगठनों ने आवाज़ बुलंद की, लेकिन समाजवादी पार्टी की अल्पसंख्यक सभा की ओर से न कोई बड़ा धरना हुआ, न कोई प्रदर्शन और न ही जिलाधिकारी कार्यालय तक कोई व्यापक जनआंदोलन देखने को मिला। लेकिन जैसे ही पूर्व मंत्री आज़म ख़ान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 ब्लॉकों को लेकर सरकारी नोटिस की चर्चा हुई, बाराबंकी में समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक संगठन सक्रिय हो गया।read more:https://khabarentertainment.in/relief-rain-falls-from-the-sky-in-bhadohi-the-carpet-city/ सपा अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष इंतिखाब आलम नोमानी अपनी टीम के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचे और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के विरुद्ध कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। उनके साथ हुमायूं नईम खान, हिमांशु यादव, नसीम कीर्ति, कामता प्रसाद यादव, विजय कुमार यादव, अजय कुमार वर्मा (बब्लू), प्रद्युम्न यादव, जितेन्द्र पटेल, क्यूम प्रधान, मोहम्मद अकरम अंसारी, अब्दुल रहीम, परवेज अहमद, सीतासरन यादव, रामशंकर यादव, राजेन्द्र यादव और फैसल अंसारी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके बाद पार्टी कार्यालय में इंतिखाब आलम नोमानी का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया और जौहर यूनिवर्सिटी बचाने के अभियान में उनके प्रयासों की सराहना की गई। वहीं राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि जिले के मुस्लिम विधायक फरीद महफूज़ किदवई कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए। वहीं पार्टी के कई प्रवक्ता, चेयरमैन, ब्लॉक प्रमुख, प्रधान और अन्य प्रभावशाली स्थानीय नेता भी इस विरोध प्रदर्शन से दूर रहे। बहरहाल, अब सियासत वहाँ नहीं जाती जहाँ औक़ाफ़ को ज़मीन बचानी हो… वहाँ जाती है जहाँ सुर्खियाँ बननी हों। और शायद यही शब्द आज जिले की राजनीति का सबसे बड़ा तफरीह का सबब बन गया है।