फर्जी दस्तावेजों से दो पासपोर्ट बनवाने का आरोपी गिरफ्तार. नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि बदलकर तैयार कराए थे पासपोर्ट, पुलिस की बड़ी कार्रवाई

जनपद आजमगढ़ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने के मामलों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वांछित आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर अपना नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि बदलकर अलग अलग पहचान के आधार पर दो पासपोर्ट बनवाने का आरोप है। पुलिस इस पूरे मामले को दस्तावेजी फर्जीवाड़े और सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ के गंभीर प्रकरण के रूप में जांच रही है।पुलिस के अनुसार, 13 मई 2026 को वरिष्ठ उपनिरीक्षक अरविन्द कुमार यादव की तहरीर के आधार पर थाना गम्भीरपुर में मोहम्मद तारिक पुत्र खालिक अहमद, निवासी मंगरावा रायपुर, थाना गम्भीरपुर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की अतिरिक्त धाराएं भी मुकदमे में बढ़ाई गईं।read more:https://khabarentertainment.in/khadiya-bazar-kota-road-becomes-a-death-trap-commuters-plagued-by-potholes-and-waterlogging/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन तथा क्षेत्राधिकारी सदर के पर्यवेक्षण में जनपद में फर्जी पासपोर्ट और कूटरचित दस्तावेजों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रविवार को उपनिरीक्षक संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रोहुआ मोड़ के पास घेराबंदी कर आरोपी मोहम्मद तारिक को दोपहर करीब 2:35 बजे गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कथित रूप से फर्जी अभिलेखों के माध्यम से अपनी वास्तविक पहचान छिपाते हुए अलग अलग विवरणों के आधार पर दो पासपोर्ट हासिल किए। इस मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में और कौन कौन लोग शामिल थे तथा इस पूरे नेटवर्क में किसी एजेंट या अन्य व्यक्तियों की भूमिका तो नहीं रही।गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी से आवश्यक पूछताछ की और विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया। मामले में आगे की जांच जारी है।इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक संजय कुमार सिंह के साथ कांस्टेबल विश्वामित्र और कांस्टेबल सूरज खरवार भी शामिल रहे।पुलिस ने बताया कि आरोपी के विरुद्ध थाना गम्भीरपुर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत मुकदमा दर्ज है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करने वालों के विरुद्ध अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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