नई दिल्ली, । इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, दिल्ली में प्रबुद्ध वर्ग के प्रतिष्ठित संगठन ‘जिज्ञासा’ द्वारा ‘हमारा संविधान एवं गृहिणियों के कार्य का आर्थिक मूल्यांकन’ विषय पर एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस श्री संजय करोल उपस्थित रहे।ऐतिहासिक संदर्भ और संवैधानिक महत्व:जस्टिस संजय करोल ने संविधान की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू कार्यों का मूल्यांकन लैंगिक समानता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों और ठोस तथ्यों को सामने रखते हुए जोर दिया कि, “यह तो केवल एक शुरुआत है; भविष्य में इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।”read more:https://worldtrustednews.in/yogi-government-working-to-make-youth-skilled-in-line-with-industry-demand/ उन्होंने इसे भारतीय समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता के भाव को सुदृढ़ करने वाला निर्णय बताया।शास्त्रों और अर्थशास्त्र का समन्वय:कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं इंडियन आर्मी की वित्तीय सलाहकार डॉ. शिवाली चौहान ने भावुक और तार्किक विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं एक गृहिणी, कामकाजी महिला और अर्थशास्त्र की छात्रा होने के नाते यह गहराई से महसूस करती हूँ कि हमारे शास्त्रों में महिलाओं को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। धन की देवी ‘लक्ष्मी’ स्वयं नारी रूप हैं।”उन्होंने आगे तर्क दिया कि वर्तमान युग में ‘अर्थ’ (finance) ही समाज में स्थान निर्धारित करने का मुख्य पैमाना बन गया है, इसलिए गृहिणियों के श्रम का आर्थिक मूल्यांकन अनिवार्य है। इस दिशा में अभी बहुत कार्य किया जाना शेष है।सार्थक विमर्श:परिचर्चा में दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक प्रोफेसरों और विधि विशेषज्ञों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। विशेषज्ञों ने विषय के कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा कर इस विमर्श को सार्थक बनाया।’जिज्ञासा’ के चेयरमैन राजकुमार भाटिया ने विषय की पृष्ठभूमि और संस्था के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री राजेश सक्सेना ने किया और अंत में सभी गणमान्य अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।