बांस के पुल से पार कर रहे नाला, 20 गांवों के लोग जोखिम में डालते हैं जान 

महराजगंज तराई (बलरामपुर) तुलसीपुर तहसील के अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाला पार करने के लिए अभी तक पुल का निर्माण नहीं कराया जा सका है। आजादी से लेकर अब तक पुल का निर्माण न होने पर ग्रामीणों ने खुद कमर कसी और प्रशासन को आईना दिखाया। सरकारी दावे फेल हुए तो ग्रामीणों ने जुगाड़ से बांस का पुल तैयार किया। बास के लट्ठों से तैयार इस जुगाड़ के पुल से 20 गांवों की 20 हजार आबादी प्रतिदिन आवागमन करती है।ग्रामीण शिवशंकर बताते हैं कि अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाला पार करने के लिए 20 से अधिक गांवों के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। बरसात में खरझार पहाड़ी नाले में कई बार बाढ़ आती है। बाढ़ के दौरान 20 गांव टापू बन जाते हैं।read more:https://pahaltoday.com/trees-planted-years-ago-are-today-providing-shade-a-clean-environment-and-solace-to-the-new-generation-birla/#google_vignetteखरझार पहाड़ी नाले को बरसात में पूरेछीटन, तिवारीडीह, बड़का अमरहवा,छोटका अमरहवा, बुड़ंतापुर, नन्हुआपुर, रूपनगर, मिर्जापुर, सुगानगर, विजयीडीह, सुखदेव पुरवा व हिम्मतपुरवा सहित 20 गांवों की 20 हजार आबादी पार नहीं कर पाती थी।चार महीने तक इन गांवों के लोगों का संपर्क कटा रहता है।परेशानी दूर करने के लिए गांवों के लोगों ने मिलकर अमरहवा गांव के पास बांस के लट्ठों का पुल तैयार किया, जिससे लोगों की परेशानी कम हो गई। ग्रामीण प्रहलाद बताते हैं कि दूसरा रास्ता न होने से बरसात में यदि इन गांवों में कोई बीमार हो जाए तो उसको अपना इलाज कराने के लिए ईश्वर पर निर्भर रहना पड़ता है। इन गांवों में एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती है। ग्राम प्रधान गवोधर का कहना है कि अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाले पर पुल और दोनों तरफ सड़क निर्माण के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। कैलाश नाथ शुक्ल, विधायक तुलसीपुर ने बताया कि अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाले पर पुल का निर्माण कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। विशेष प्रयास करके पुल का निर्माण कराया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो

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