बीना, सोनभद्र। मानसून की दस्तक के साथ ही रिहंद जलाशय में बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता गहरा गई है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि खदानों और तापीय परियोजनाओं से निकलने वाला कोल डस्ट, राख एवं रासायनिक मिश्रित पानी विभिन्न नालों के माध्यम से सीधे रिहंद जलाशय में पहुंच रहा है, जिससे जलाशय की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। उनका आरोप है कि कई परियोजनाओं से निकलने वाला प्रदूषित पानी बिना समुचित उपचार के नालों के जरिए जलाशय में पहुंच रहा है। ऐसे में बरसात के दौरान बड़ी मात्रा में गाद, राख और कोल डस्ट के जलाशय में समाने की आशंका और बढ़ जाती है। लोगों के अनुसार, विशेष रूप से बलिया नाला सहित अन्य जल निकासी मार्गों से बहने वाला काला पानी रिहंद में पहुंच रहा है।read more:https://pahaltoday.com/pm-modi-explained-the-importance-of-every-vote-and-said-that-everyone-should-use-their-vote/उनका कहना है कि इससे न केवल जल प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि जलाशय में गाद भरने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि बारिश के मौसम से पहले संबंधित परियोजनाओं में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट एवं अन्य प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाएं स्थापित की जाएं, ताकि रासायनिक एवं ठोस अपशिष्ट जलाशय में जाने से रोका जा सके। साथ ही नालों की नियमित निगरानी और जल गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच भी कराई जाए। रिहंद जलाशय उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों के लिए पेयजल, सिंचाई तथा बिजली उत्पादन का महत्वपूर्ण श्रोत है। ऐसे में पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि जलाशय की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित परियोजनाओं अथवा अधिकारियों का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है।