नाटक श्रीमान चोर मानवीय रिश्तों की सच्चाई

नई दिल्ली, । राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी द्वारा नाटक श्रीमान चोर का मंचन अभिमंच सभागार में किया गया। यह नाटक विश्वविख्यात इतालवी नाटककार एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित डारियो फ़ो के नाटक द वर्चुअस बर्गलर का जीवंत हिन्दी रूपांतरण है। नाटक का रूपांतरण, संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी इश्तियाक ख़ान द्वारा किया गया। इस नाटक को लेकर दर्शकों में बेहतर प्रतिक्रिया देखने को मिली। हास्य, व्यंग्य और अप्रत्याशित घटनाओं से भरपूर यह प्रहसन एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो चोरी के इरादे से एक धनी व्यक्ति के घर में प्रवेश करता है। किंतु घटनाक्रम कुछ ऐसा मोड़ लेता है कि वह गलतफहमियों के जाल में उलझ जाता है। घर का मालिक अपनी प्रेमिका के साथ वहाँ पहुँच जाता है, उसके पीछे उसकी पत्नी, फिर उस व्यक्ति की पत्नी तथा अन्य अप्रत्याशित पात्रों के आगमन से परिस्थितियाँ हास्यास्पद अराजकता में बदल जाती हैं।अपनी चुटीली कथा और तीव्र गति से आगे बढ़ने वाली घटनाओं के माध्यम से यह नाटक वैवाहिक बेवफ़ाई, सामाजिक पाखंड और मानवीय संबंधों जैसे विषयों को सामने लाता है।read more:https://pahaltoday.com/chaiya-chaiya-on-the-railway-track-in-vietnam/ जहाँ समाज के सम्मानित माने जाने वाले पात्र अपने रहस्यों को छिपाने का प्रयास करते हैं, वहीं नाटक साधारण व्यक्ति की स्पष्टवादिता और ईमानदारी को हास्यपूर्ण ढंग से रेखांकित करता है। व्यंग्य और हास्य के प्रभावी संयोजन के साथ यह प्रस्तुति समकालीन समाज पर एक मनोरंजक तथा विचारोत्तेजक टिप्पणी प्रस्तुत करती है।नाटक की वेशभूषा परिकल्पना दीपांकर पॉल द्वारा की गई है। ध्वनि परिकल्पना सैंडी सिंह ने तैयार की है, जबकि प्रकाश परिकल्पना दिव्यांग श्रीवास्तव ने की है। मंच सज्जा का दायित्व श्रद्धा विश्वास एवं निलोय डे ने संभाला है। कुल मिलाकर नाटक दर्शकों में अपनी एक अलग छाप छोड़ता है। मंच सच्चा बहुत भव्य है जो नाटक को और बेहतर बनाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *