गाजीपुर/प्रयागराज। गाजीपुर में प्रतिष्ठित होटल व्यवसायी आलोक राय के पुत्र की निर्मम हत्या की घटना पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सामाजिक समरसता के समर्थक दीपक कुमार पाण्डेय ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे मानवता को झकझोर देने वाला जघन्य अपराध बताया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दोषियों के विरुद्ध त्वरित एवं कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।वरिष्ठ अधिवक्ता दीपक कुमार पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं केवल एक परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को गहरी पीड़ा पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि अपराधियों को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और कानून के अनुसार उन्हें कठोर से कठोर दंड दिया जाना चाहिए ताकि समाज में न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रहे।read more:https://pahaltoday.com/agitation-intensifies-over-pending-honorarium-district-president-of-gram-rozgar-sevak-sangh-on-hunger-strike-in-bahraich/उन्होंने कहा कि किसी भी अपराध को जाति, धर्म या बिरादरी के चश्मे से देखना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। घटना के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर सामने आ रही कुछ जातीय टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के अपराध के आधार पर पूरे समाज या समुदाय को कटघरे में खड़ा करना सामाजिक सौहार्द के लिए घातक है। इससे समाज में अनावश्यक तनाव और वैमनस्य की स्थिति पैदा होती है। दीपक कुमार पाण्डेय ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता और न्याय का अधिकार देता है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति के कृत्य के लिए पूरे समाज को दोषी ठहराना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि हर समाज में कानून का सम्मान करने वाले ईमानदार और जिम्मेदार लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अपराधी किसी भी वर्ग में हो सकता है, उसी प्रकार सज्जन लोग भी हर वर्ग में मिलते हैं। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर पूरे समुदाय का आकलन करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी सभ्य समाज अपराध का समर्थन नहीं करता। जो व्यक्ति कानून तोड़ता है, उसे कानून के दायरे में लाकर दंडित किया जाना चाहिए। समाज को न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और भावनाओं में बहकर ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दें। वरिष्ठ अधिवक्ता ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गाजीपुर की इस दुखद घटना को लेकर सभी वर्गों को न्याय की मांग के लिए एकजुट होना चाहिए। अपराध के खिलाफ सामूहिक आवाज उठाना आवश्यक है, लेकिन किसी निर्दोष समाज या समुदाय को बदनाम करना उचित नहीं है। वर्तमान समय में समाज को भाईचारे, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है। अंत में उन्होंने कहा कि “अपराधी की पहचान उसके अपराध से होती है, न कि उसकी जाति, धर्म या बिरादरी से। इसलिए न्याय अपराधी को मिले, किसी पूरे समाज को नहीं।”