ब्रेन ऑपरेशन के बाद निकली टीबी, 9 महीने के इलाज से पवन ने जीती जिंदगी की जंग

बहराइच। “मैं मान चुका था कि दिमाग की टीबी के बाद कभी सामान्य नहीं हो पाऊंगा, लेकिन सही इलाज और हौसले ने सब बदल दिया।” यह कहना है फखरपुर निवासी 43 वर्षीय पवन मिश्रा का, जो आज ‘टीबी चैंपियन’ बनकर समाज में जागरूकता फैला रहे हैं।पवन बताते हैं कि वर्ष 2021 में लगातार सिरदर्द और उल्टी की शिकायत पर लखनऊ के एक निजी अस्पताल में उनका ब्रेन ऑपरेशन हुआ, जिसमें करीब 325 ग्राम की गांठ निकाली गई। बायोप्सी जांच में ‘ब्रेन टीबी’ की पुष्टि हुई। ऑपरेशन के बाद घाव से लगातार मवाद बहने लगा, जिससे उन्हें सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ा और उनका मनोबल टूट गया।निराशा के इस दौर में सीएचसी फखरपुर के डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू कराया। ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत मिली सहायता और नियमित दवा से एक महीने में सुधार शुरू हुआ और 9 महीने का कोर्स पूरा करने के बाद पवन पूरी तरह स्वस्थ हो गए।आज पवन ‘वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर’ के ‘इम्पैक्ट इंडिया प्रोजेक्ट’ से जुड़कर ग्रामीणों को टीबी के प्रति जागरूक कर रहे हैं।जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा के अनुसार, बाल और नाखून को छोड़कर टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। समय पर इलाज मिलने पर 95% मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।read more:https://pahaltoday.com/could-not-conduct-even-a-single-examination-honestly-and-still-claims-to-be-the-world-guru/जिले में सीएचसी और जिला अस्पतालों में आधुनिक मशीनों से टीबी की जांच और इलाज निःशुल्क उपलब्ध है। साथ ही ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत मरीजों को प्रति माह ₹1000 की सहायता दी जाती है।

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