डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा
भाई साहब, ये जुकरबर्ग अंकल ने जो वाट्सएप्प में ‘दिस मैसेज वास डिलीटेड’ और ‘एडिटेड’ का फीचर डाला है न, कसम से ये सुविधा नहीं, सीधे-सीधे घर उजाड़ने का नो-कॉन्फिडेंस मोशन है। इंस्टाग्राम और फेसबुक वाले तो फिर भी सॉर्टेड हैं, चुपचाप अनसेंड मारो और मामला रफा-दफा, जैसे गंगा जी में पाप धो दिए। लेकिन वाट्सएप्प? ये तो वो मोहल्ले की बकबकी चाची है जो चिल्ला-चिल्लाकर कहती है, “अरे सुनो, इसने अभी कुछ छुपाया है, पकड़ो इसे!” मेरी लाइफ की सबसे बड़ी आफत ये है कि मेरी करंट गर्लफ्रेंड का नाम रिया है और एक्स का प्रिया। अब उँगलियाँ हैं, कभी-कभी बहक जाती हैं और ‘आई लव यू प्रिया’ टाइप हो जाता है। रिया का खुद का एक्स पास्ट टेंस हो चुका है, उसका भूत वैलिड है, लेकिन मेरे मुंह से गलती से भी प्रिया निकल गया तो समझो थर्ड वर्ल्ड वार ऑन। रिया को वैसे तो एग्जाम का सिलेबस याद नहीं रहता, पर मेरी वाट्सएप्प हिस्ट्री की वो चलती-फिरती विकिपीडिया है। कहती है, “औए सूरी, पिछले एक महीने में तुमने 312 बार मैसेज डिलीट किए हैं और 171 बार एडिट! तुम मुझसे क्या छुपा रहे हो, तुम्हारा कैरेक्टर ही स्केची है!”अब लड़कियों का वाट्सएप्प बिहेवियर भी भाई एकदम नेक्स्ट लेवल डिटेक्टिव मोड होता है। जैसे ही चैट्स में वो ‘दिस मैसेज वास डिलीटेड’ का साइनबोर्ड देखती हैं, उनके भीतर का ब्योमकेश बाबू जाग जाता है। वो मैसेज के टाइमस्टैम्प को ऐसे घूरती हैं जैसे कोई ज्योतिषी कुंडली देख रहा हो। अगर गलती से टाइपिंग… दिखकर गायब हो जाए, तो उनका बीपी 180 पार हो जाता है। वो आपके ऑनलाइन आने और लास्ट सीन के बीच का टाइम डिफरेंस ऐसे कैलकुलेट करती हैं जैसे नासा वाले रॉकेट की ट्रेजेक्टरी निकालते हैं। स्क्रीनशॉट लेकर सहेलियों के ग्रुप चैट में पैनल डिस्कशन बिठाया जाता है कि “लुक गर्ल्स, इसका क्या मतलब हो सकता है?” ब्लू टिक न आए तो घोस्टिंग का इल्जाम, और अगर आ जाए और रिप्लाई दो मिनट लेट हो, तो सस्पिशियस एक्टिविटी का वारंट जारी। वो स्टेटस पर ऐसे सैड सॉन्ग्स लगाएँगी जैसे पूरी दुनिया का गम उन्हीं की झोली में आ गिरा हो, और अगर आपने उस स्टेटस को दो मिनट के अंदर सीन नहीं किया, तो आप अनकेयरिंग और टॉक्सिक घोषित हो जाते हैं। इनकी पूरी दुनिया ही एकदम उल्टी खोपड़ी की चलती है। जब पूरी दुनिया चैन की बंसी बजाकर सो रही होती है, तब ये रात के ढाई बजे उल्लू की तरह आँखें फाड़कर जागेंगी। फिर शुरू होगा फोन पर ऊँ-ऊँ का अंतहीन सिलसिला, जो सुबह की अज़ान और चिड़ियों की चहचहाहट तक बिना किसी कमर्शियल ब्रेक के चलता रहता है। आप नींद में खर्राटे मारने वाले होते हैं और उधर से आवाज़ आती है, “तुम मुझे टाइम नहीं देते, तुम्हारा इंटरेस्ट कम हो गया है।” आधी रात को वो पुरानी दो साल पहली चैट खोदकर निकालेंगी, उसका फॉरेंसिक ऑडिट करेंगी और आपके कान का ऐसा कीमा बनाएँगी कि सुबह तक कान से सचमुच खून निकलने लगे। और जैसे ही सूरज उगेगा, जब पूरी दुनिया काम पर जाने के लिए भाग रही होगी, ये मोहतरमा चादर तानकर, घोड़े बेचकर ऐसी कुंभकरणी नींद सोएँगी कि दोपहर के दो बजे से पहले इनका सिस्टम रीबूट ही नहीं होता। दिन में सोकर ये ब्यूटी स्लीप लेती हैं और रात को बॉयफ्रेंड का भेजा फ्राई करके अपनी आत्मा को तृप्त करती हैं।read more:https://pahaltoday.com/himachal-mountain-cracks-cause-jahlma-bridge-to-collapse-car-falls-into-river/खैर, कल रात को पानी सिर से ऊपर चला गया। रात के ठीक 3 बजकर 14 मिनट पर रिया ने वही 312 डिलीटेड मैसेजेस का पुराना रोना फिर से छेड़ दिया। मैंने कहा, “देखो रिया, वो बस टाइपो था, तुम तिल का पहाड़ बना रही हो।” उसने तुरंत डायलॉग मारा, “टाइपो 171 बार नहीं होता सूरी! तुम्हारी इस चुगलीखोरी ऐप की हर हरकत पर मेरी नजर है। तुम पक्का उस प्रिया से पैचअप कर रहे हो। आज फैसला होकर रहेगा, या तो वो डिलीटेड मैसेजेस वापस लाओ या मुझे भूलो!” अब भाई, रात भर की ऊँ-ऊँ से मेरा भेजा पूरी तरह कबाड़ हो चुका था, खोपड़ी का दही बन गया था। मैंने आव देखा न ताव, सीधे अपने फोन की सेटिंग्स में गया और वाट्सएप्प को हमेशा-हमेशा के लिए अनइंस्टॉल मार दिया। सोचा कि अब न रहेगा बाँस और न बजेगी रिया की बाँसुरी। कम से कम इस डिजिटल कुरुक्षेत्र से तो मुक्ति मिलेगी और मैं चैन से घोड़े बेचकर सो पाऊँगा।सुबह जब मेरी आँख खुली, तो दरवाजे पर जोर-जोर से दस्तक हो रही थी, जैसे इनकम टैक्स वाले रेड मारने आए हों। मैंने आंखें मलते हुए दरवाजा खोला तो सामने रिया खड़ी थी, हाथ में कड़क चाय का थरमस और उसमानिया बिस्कुट का डिब्बा था। मैंने चौंककर पूछा, “ये क्या तमाशा है रिया? सुबह-सुबह?” रिया ने एकदम गदगद होकर कहा, “थैंक यू सूरी! तुमने मेरे लिए वाट्सएप्प ही डिलीट कर दिया? जैसे ही मेरी सहेली ने बताया कि तुम्हारा लास्ट सीन और डीपी दोनों गायब हैं, मुझे समझ आ गया कि तुम मेरे प्यार में इस चुगलीखोर दुनिया को छोड़ चुके हो। मैंने तुरंत पापा को फोन करके बताया कि सूरी ने अपनी प्रिया वाली उँगलियों पर लगाम लगाने के लिए वाट्सएप्प की ही बलि दे दी है! पापा तुम्हारे इस डिजिटल त्याग से इतने इम्प्रेस हुए कि उन्होंने तुरंत तुम्हें घर पर शादी की बात फाइनल करने के लिए बुलाया है। वो कह रहे हैं कि जो लड़का अपने वाट्सएप्प का मर्डर कर सकता है, वो मेरी बेटी को कभी घोस्ट नहीं करेगा। चलो जल्दी तैयार हो जाओ, पापा तुम्हारा ग्रीन सिग्नल लिए आरती का थाल सजाकर इंतजार कर रहे हैं!” यह सुनकर मेरा दिमाग ऐसा घूमा कि मेरे अंदर का सारा लॉजिक और विवेक एक साथ फ्यूज हो गया। जिस आफत से बचने के लिए मैंने ऐप डिलीट किया था, उसी ऐप की मौत अब मुझे सीधे शादी के मंडप की तरफ धकेल रही थी!