पाकिस्तान द्वारा भारत के प्रति दुष्प्रचार के बावजूद भारत दिखाई दरियादिली

अशोक भाटिया 

भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था। उसने सिंधु जल संधि को भी स्थगित कर दिया था। भारत के इस फैसले ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया, जिसका असर अभी तक बना हुआ है। इसी वजह से पाकिस्तान अब भारत के सामने हाथ फैलाता नजर आ रहा है। पाक ने मंगलवार (27 मई) को भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने का आग्रह किया। पाकिस्तान ने कहा कि संधि को स्थगित करने का कोई भी प्रयास कई देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। समाचारों  के मुताबिक ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जल सम्मेलन को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ। मुसादिक मलिक ने भारत पर साझा जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमा पार नदियों को प्रभावित करने वाली एकतरफा कार्रवाई जल सुरक्षा, खाद्य उत्पादन और जलवायु परिवर्तन से निपटने से संबंधित गंभीर वैश्विक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। मलिक ने भारत से सिंधु जल संधि का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तंत्रों का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संधि को स्थगित करने का कोई भी प्रयास दुनिया भर के निचले इलाकों में स्थित देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करेगा। पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए थे, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था। पाकिस्तान ने भारत द्वारा संधि को निलंबित किए जाने को खारिज कर दिया और कहा कि समझौते के तहत पाकिस्तान के लिए पानी रोकने के लिए उठाए गए किसी भी कदम को युद्ध की तरह माना जाएगा। विश्व बैंक की मध्यस्थता से पूरी हुई सिंधु जल संधि, 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है। मलिक ने पाकिस्तान की बढ़ती जलवायु चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि वैश्विक तापमान वृद्धि से सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों में पाकिस्तान भी शामिल है। बहरहाल सिंधु जल संधि  के निलंबन के बावजूद भारत ने एक बार फिर मानवीय गरिमा और जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित सलाल बांध से गाद निकालने और मानसून से पहले जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए भारत ने बांध के स्पिलवे गेट खोल दिए हैं। इसके चलते चिनाब नदी में पानी का बहाव तेजी से बढ़ने की संभावना है। भारत सरकार ने इस बढ़े हुए जलप्रवाह के बारे में पाकिस्तान को अरली वार्निंग भेजकर सतर्क कर दिया है ताकि निचले इलाकों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर जा सकें। भारत से मिले इस आधिकारिक इनपुट के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तुरंत फ्लड अलर्ट घोषित कर दिया गया है। सियालकोट के डिप्टी कमिश्नर समेत आपदा प्रबंधन अधिकारियों को नदी पर 24 घंटे निगरानी रखने और आम जनता को चिनाब के किनारों से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह पिछले आठ महीनों में दूसरा मौका है जब भारत ने संधि निलंबित होने और पाकिस्तान के लगातार दुष्प्रचार के बाद भी उसे इस तरह की आपदा से बचाने के लिए समय रहते सूचना दी है। इससे पहले अगस्त 2024 में भी भारत ने सतलुज नदी में बाढ़ आने की चेतावनी देकर पाकिस्तान के हजारों नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद की थी। गौरतलब है कि चिनाब, सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों में से एक है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच साझा है। सिंधु संधि के तहत, भारत को सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के जल पर असीमित अधिकार प्राप्त हैं। पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब पर अधिकार प्राप्त हुए हैं। हालांकि, वर्षों से भारत इन नदियों का उपयोग सिंचाई और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए कर रहा है, जिससे पाकिस्तान काफी असंतुष्ट है। पिछले सप्ताह, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के जिला मजिस्ट्रेट ने मानसून से पहले गाद निकालने के लिए सलाल बांध के स्पिलवे गेट खोलने की घोषणा की। इसकी जानकारी पंजाब प्रांत के कृषि विभाग को भी दी गई। सियालकोट के उपायुक्त ने आपदा प्रबंधन अधिकारियों को सतर्क करते हुए कहा कि भारत द्वारा बांध के स्पिलवे गेट खोलने के कारण चिनाब नदी का जलस्तर दो से तीन मीटर तक बढ़ सकता है। अधिकारियों को नदी की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने और चिनाब के किनारों पर लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया है। 130 मीटर ऊंचे बांध वाला सलाल बांध, सिंधु संधि के तहत भारत द्वारा निर्मित पहली जलविद्युत परियोजना थी। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने बारिश के बाद बढ़े जलस्तर के कारण होने वाले अतिप्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बांध के गेट थोड़े समय के लिए खोले हैं। read more:https://pahaltoday.com/weather-scorching-heat-in-some-parts-of-the-country-heavy-rain-warning-in-others/दिलचस्प बात यह है कि भारत के इस कदम के बावजूद, इस्लामाबाद वैश्विक मंच पर दिल्ली को बदनाम करना जारी रखे हुए है। भीषण गर्मी से पहले उसकी चिंता स्पष्ट रूप से झलक रही है। एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था होने के नाते, पाकिस्तान पंजाब में कृषि और सिंचाई के लिए सिंधु नदी के जल प्रवाह पर अत्यधिक निर्भर है, जिसे देश की अनाज की टोकरी कहा जाता है। पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर इस मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठा रहा है ताकि भारत सिंधु बेसिन के जल को साझा करने के मुद्दे पर अपना रुख नरम करे। ताजिकिस्तान में आयोजित जल सम्मेलन में पाकिस्तानी मंत्री डॉ। मुसादिक मलिक ने भारत पर साझा जल संसाधनों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उसी दिन, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने संयुक्त राष्ट्र में इस बात पर ज़ोर दिया कि सिंधु संधि को निलंबित रखकर दक्षिण एशिया में “स्थायी शांति” स्थापित नहीं की जा सकती। डार ने आगे कहा, “जल को कभी भी हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। दरअसल, पिछले आठ महीनों में यह दूसरी बार है जब भारत ने इस तरह का सहयोग दिया है। पिछले साल अगस्त में, भारत ने पाकिस्तान को सतलुज नदी में संभावित बाढ़ के बारे में आगाह किया था, जब उसने अतिप्रवाहित बांधों और उफनती नदियों से पानी छोड़ा था। भारत के इस सहयोग से पाकिस्तान समय रहते निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में सफल रहा। उस समय भी, पाकिस्तान ने इस सहयोग को स्वीकार नहीं किया और अपना दुष्प्रचार अभियान जारी रखा। वैसे भारत द्वारा सिंधु जल संधि (IWT) को ठंडे बस्ते में डालना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक झटका है। वर्ष 1960 में हस्ताक्षरित यह संधि भारत-पाकिस्तान के बीच 1965, 1971 और 1999 के भीषण युद्धों के दौरान भी कभी नहीं रुकी थी। लेकिन, 2025 में पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने अपनी कूटनीति में बड़ा बदलाव किया। भारत ने न केवल संधि को निलंबित किया बल्कि मानसून के दौरान पाकिस्तान के साथ साझा किए जाने वाले वॉटर-लेवल डेटा को भी पूरी तरह से बंद कर दिया। यह डेटा पाकिस्तान के लिए पंजाब और सिंध प्रांतों में बाढ़ से बचने का एकमात्र जरिया था। इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें तो यह साफ होता है कि भारत ने भले ही कड़े दंडात्मक कदम उठाते हुए डेटा शेयरिंग रोक दी हो लेकिन वह एक गैर-जिम्मेदार देश की तरह काम नहीं कर रहा है। चिनाब नदी को लेकर दिया गया यह ताजा अलर्ट दिखाता है कि भारत कूटनीतिक मोर्चे पर बेहद परिपक्व है; वह बिना संधि के बंधनों के भी मानवीय आधार पर आपदा प्रबंधन की जानकारी साझा कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान की बौखलाहट वैश्विक मंचों पर साफ दिख रही है, क्योंकि आने वाले सूखे और गर्मियों के मौसम में सिंधु बेसिन के पानी के बिना उसकी पूरी खेती बर्बाद हो सकती है। भारत के इस कदम ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि दिल्ली आतंकवाद पर कोई ढील नहीं देगा, लेकिन बेकसूर नागरिकों की जान बचाने के भूगोल और नदियों के प्राकृतिक नियमों का सम्मान हमेशा करेगा। भारत ने पाकिस्तान को चिनाब नदी को लेकर जो  ताजा चेतावनी जारी की है उसके अनुसार भारत ने पाकिस्तान को सूचित किया है कि जम्मू-कश्मीर में सलाल बांध के स्पिलवे गेट खोलने के कारण चिनाब नदी में 30 मई तक पानी का बहाव तेजी से बढ़ सकता है, जिससे वहां बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। अब सवाल यह भी है कि बांध के गेटों को अचानक क्यों खोलना पड़ा? क्योकि मानसून सीजन की शुरुआत से पहले बांध में जमा हुई गाद  को साफ करने और अत्यधिक पानी के ओवरफ्लो को प्रबंधित करने के लिए सलाल बांध के स्पिलवे गेट्स को खोला गया है।

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