शिमला। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के उदयपुर में बिन बरसात ही कुदरत का भारी कहर देखने को मिला है।सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण तांदी-संसारी मार्ग पर लगातार हो रहे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के कारण आखिरकार ऐतिहासिक जाहलमा पुल टूट कर नदी में समा गया है। बीते तीन दिनों से इस पुल के एक छोर पर पहाड़ी से लगातार भारी चट्टानें गिर रही थीं, जिसके चलते अब पुल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह धराशाई हो गया है। इस आपदा के कारण उदयपुर का लाहौल के मुख्य केंद्र केलांग और मनाली से संपर्क पूरी तरह कट गया है। जाहलमा पुल के टूटने से घाटी के लोगों की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। अब यदि स्थानीय निवासियों या पर्यटकों को मनाली या शेष हिमाचल के अन्य हिस्सों में जाना है, तो उन्हें पांगी घाटी होते हुए खतरनाक साच पास को पार कर चंबा के रास्ते सफर करना होगा। इस वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करने में लोगों को करीब दो दिन का अतिरिक्त समय लगेगा। इसी बीच लाहौल की मूलिंग घाटी से भी एक और दर्दनाक हादसे की खबर आई है, जहां बीती रात करीब 10 बजे अचानक पहाड़ी दरक गई। इस लैंडस्लाइड की चपेट में आकर एक चलती कार अनियंत्रित होकर सीधे उफनती नदी में जा गिरी। हादसे के वक्त कार में केवल चालक ही सवार था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और मुस्तैद पुलिस बल ने तुरंत संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कार सवार को सुरक्षित नदी से बाहर निकालकर केलांग अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है।read more:https://worldtrustednews.in/congressmen-attracted-to-the-cockroach-janata-party-desperate-for-alliance/ स्थानीय निवासियों का कहना है कि मूलिंग में आए दिन लैंडस्लाइड होता रहता है, जिससे हर वक्त लोगों की जान पर खतरा मंडराता रहता है। इससे पहले मंगलवार को भी मूलिंग में भारी चट्टानें गिरने से लेह-मनाली नेशनल हाईवे घंटों बंद रहा था। तीन दिनों से रुक-रुककर दरक रहे पहाड़ प्रशासन के अनुसार, लाहौल घाटी के उदयपुर स्थित जाहलमा में पिछले तीन दिनों से रुक-रुक कर पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें गिर रही थीं, जिसके खौफनाक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने मंगलवार को इस मार्ग पर सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक ही वाहनों की आवाजाही की अनुमति देने का फरमान सुनाया था, लेकिन अब पूरी पहाड़ी के दरकने से यह मार्ग पूरी तरह ठप्प हो गया है। पहाड़ी से विशालकाय चट्टानें गिरने के कारण सड़क पर भी गहरी और बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मार्ग को दोबारा सुचारू करने में कम से कम एक सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है।