आखिर स्वच्छ हवा चुनावीय एजेंडा क्यों नहीं बनती

पहल टुडे ब्यूरो

आये दिन चुनाव में नेता लोग हमारे बीच दिखने लगते हैं. उनका चुनावीय वादे यानी एजेंडा एक से बढ़ कर एक हो जाते हैं. वे बस चुनाव में जीत के लिए हर पैतरे खेलने को तैयार हो जाते हैं। उसमे लुभावने वादे भी खूब किये जाते हैं लेकिन स्वच्छ हवा इसमें क्यों नहीं शामिल होती है.किसी भी पार्टी के एजेंडे में आखिर क्यों नहीं शामिल की जाती है। जो कि हमारी सबसे प्रथम जरूरत में शामिल है. प्रश्न यह है कि क्या यह चुनावीय एजेंडा यानी मुद्दा नहीं हैं।
अगर आकडों पर बात करें तो डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है दुनिया में भारत पहले नंबर है जहां पांच साल से कम उम्र के बच्चों की सबसे ज्यादा मौते होती हैं। प्रदूषण के कारण 2016 में करीब एक लाख बच्चों की मौतें हुई हैं जिसका मुख्य कारण जहरीली हवा है।
इसके बाद नाजीरिया का नंबर आता है जहां करीब पचास हजार बच्चों की मौतें होती हैं। अब सवाल हम यही करना चाहते हैं कि क्यों इस पर सरकार अपना चुनावीय एजेंडा नहीं बनाती और ना ही कुछ ठोस कदम उठाती है। लगातार भारत में प्रदूषण तेजी से बढता ही जा रहा है।

प्रदूषण के चपेट में सबसे ज्यादा दिल्ली एनसीआर और सभी मेट्रो शहरों का नाम षुमार है। कागजों पर तो हर तरह की कोशिश की जाती है लेकिन हकीकत से परे होती हैं। ऐसे में सरकार को जागने की जरूरत है ताकि अपने भविष्य यानि बच्चों को बचाया जा सके।

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