हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाएं खारिज

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर कहा कि अदालत संसद को कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर कानून बनाना विधायिका का अधिकार है। शीर्ष अदालत केवल जरूरत की ओर ध्यान दिला सकती है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि नीति बनाना और कानून तैयार करना विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत इसमें कोई दखल नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला उन याचिकाओं पर दिया, जिसमें केंद्र की मोदी सरकार को हेट स्पीच और अफवाह फैलाने से जुड़े कानूनों की समीक्षा कर नया कानून बनाने का निर्देश देने की मांग उठी थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा हेट स्पीच जैसे मामलों से निपटने के लिए सक्षम है। समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके लागू होने में देरी या असमानता की है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक कई मामलों में कार्रवाई समय पर नहीं होती या एक जैसी नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह कहना सही नहीं है, कि इस क्षेत्र में कोई कानूनी खालीपन है।read more:https://pahaltoday.com/the-victim-should-get-speedy-justice-the-complaint-should-be-resolved-based-on-the-satisfaction-of-the-complainant-dm/ कानून मौजूद हैं और उनमें कई प्रावधान हैं, जो सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने या समुदायों के बीच तनाव फैलाने वाले व्यवहार से निपट सकते हैं। दिक्कत कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके लागू होने के तरीके में है।

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