जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में “मिशन ड्रग फ्री कैंपस एवं सोसाइटी” अभियान के अंतर्गत आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सोमवार संपन्न हुई। अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान विभाग एवं डीन छात्र कल्याण कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में नशा मुक्ति, मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के विभिन्न आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला का विषय “ड्रग-फ्री सोसाइटी एवं कैंपस का निर्माण: मनो-सामाजिक, चिकित्सकीय एवं आध्यात्मिक मार्ग” रहा। विशेषज्ञों ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराते हुए जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।read more:https://pahaltoday.com/india-gets-gold-gift-during-oil-crisis-estimated-reserves-of-42-5-tonnes-in-andhra/
इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में नई सुबह, वाराणसी और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ । इस समझौते का उद्देश्य शैक्षणिक, शोध एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में संयुक्त सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत दोनों संस्थान मिलकर कई गतिविधियाँ संचालित करेंगे, जिनमें अतिथि व्याख्यान, विशेषज्ञ वार्ता, फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम, छात्र प्रशिक्षण, इंटर्नशिप एवं फील्डवर्क, संयुक्त कार्यशालाएँ, सेमिनार एवं सम्मेलन, शोध सहयोग एवं प्रकाशन शामिल हैं। साथ ही मनोवैज्ञानिक आकलन, परामर्श एवं थेरेपी अनुभव, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम, “नशा मुक्त भारत@2047” अभियान के अंतर्गत ड्रग-फ्री कैंपस एवं समाज अभियान, आत्महत्या रोकथाम पहल, विश्वविद्यालय छात्रों के लिए मुफ्त टेली-काउंसलिंग तथा मासिक ऑफलाइन मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं परामर्श शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। समझौते के तहत प्रशिक्षण एवं वार्षिक भ्रमण के लिए न्यूनतम बैच आकार आपसी सहमति से तय होगा तथा प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के लिए गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, नई सुबह और विश्वविद्यालय का “आनंदम: सेंटर फॉर एक्सीलेंस” मिलकर सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य, हैप्पीनेस अध्ययन, प्रशिक्षण एवं सामुदायिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देंगे। इस समझौता ज्ञापन को मानसिक स्वास्थ्य, नशा मुक्ति और छात्र कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्य अतिथि प्रो. आर. बी. कमल ने कहा कि नशा समाज और विशेषकर युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। विशिष्ट अतिथि कर्नल आलोक डी. सिंह ने अनुशासन और जागरूकता को नशा उन्मूलन का प्रभावी माध्यम बताया, जबकि देवेश सिंह (क्षेत्राधिकारी सदर, जौनपुर) ने प्रशासनिक स्तर पर चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर को नशा मुक्त बनाने के लिए निरंतर जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर बल दिया। सह-संरक्षक एवं मुख्य वक्ता डॉ. अजय तिवारी (नई सुबह, वाराणसी) ने मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास के क्षेत्र में समन्वित प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। तकनीकी सत्रों में डॉ. विनोद वर्मा (मनोरोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज) ने चिकित्सा एवं मनोचिकित्सकीय दृष्टिकोण से नशा मुक्ति पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. क्षितिज शर्मा (आर्ट ऑफ लिविंग, बेंगलुरु) ने आध्यात्मिक उपायों की भूमिका को रेखांकित किया। रागिनी प्रसाद, श्रेया गुप्ता, खुशबू मोदनवाल, ईशा एवं डिम्पल सैनी द्वारा नशा मुक्ति से जुड़े केस स्टडी प्रस्तुत किए गए। राउंड टेबल पैनल चर्चा में डॉ. विनोद कुमार सिंह, प्रो. देव राज सिंह, प्रो. विनोद कुमार, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. प्रमोद के. यादव, श्रीमती सीमा सिंह, प्रो. रुचिरा सेठी, अमरेंद्र पांडेय तथा डॉ. सरिता पांडेय सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने “ड्रग फ्री कैंपस एवं सोसाइटी: विभिन्न हितधारकों की भूमिका” विषय पर अपने विचार साझा किए।read more:https://pahaltoday.com/firing-on-indian-ship-in-strait-of-hormuz-due-to-internal-tension-in-iran/समापन सत्र में क्षेत्राधिकारी सदर, जौनपुर देवेश सिंह, वित्ताधिकारी आत्म प्रकाश धर द्विवेदी एवं प्रो. अजय द्विवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मनोज पाण्डेय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान आयोजक सचिव डॉ. चंदन सिंह, अमरेश यादव ,दिव्यांशु सिंह, पवन सोनकर, पृथ्वी सिंह सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन ईश्विका सिंह ने किया।