परशुराम जयंती पर विचार गोष्ठी: वक्ताओं ने बताया—‘तेजस्वी संत और अद्वितीय योद्धा’

कायमगंज / फर्रुखाबाद। विश्व बंधु परिषद के तत्वावधान में भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें तेजस्वी संत, अद्वितीय योद्धा और राष्ट्र प्रेरणा का स्रोत बताया। कार्यक्रम में साहित्यकार प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ‘रत्नेश’ ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारत के भाग्य निर्माता हैं। उन्होंने उनके त्वरित निर्णय और अडिग, सटीक रणनीति को आज के भारत के लिए मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि इसी दृष्टिकोण से देश विश्व शक्ति बन सकता है। वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. विकास शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम का सम्पूर्ण जीवन शस्त्र और शास्त्र, ज्ञान और कर्म के अद्भुत संतुलन की मिसाल है।read more:https://pahaltoday.com/in-tamil-nadu-the-elections-have-become-a-battle-for-personal-image-along-with-the-politics-of-hero-versus-villain/ वहीं पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने उन्हें विश्व इतिहास का अनुपम योद्धा बताते हुए कहा कि उनके जैसा उदाहरण कहीं और देखने को नहीं मिलता।प्रधानाचार्य योगेश तिवारी ने कहा कि भगवान परशुराम ने हमें स्वाभिमान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी, जबकि प्रधानाचार्य अमरनाथ शुक्ला ने उनके कर्मयोगी स्वरूप को रेखांकित करते हुए कहा कि आत्मबल से बढ़कर कोई शक्ति नहीं होती, और शक्ति के बिना ज्ञान भी अधूरा है। शिक्षक वी.एस. तिवारी ने राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा के संदर्भ में कहा कि आत्मरक्षा हेतु किया गया संघर्ष न्यायोचित होता है। कार्यक्रम संयोजक आचार्य शिवकांत शुक्ला ने स्पष्ट किया कि भगवान परशुराम किसी एक जाति या वर्ग के नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए आदर्श हैं। कार्यक्रम में काव्य की भी प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिली। छात्र कवि यशवर्धन ने ओजपूर्ण पंक्तियों से समा बांधते हुए कहा कि— “दुष्टों, बैठो चैन से नहीं बचेगी जान, अगर आ गए फिर कहीं परशुराम भगवान।” वहीं युवा कवि अनुपम मिश्रा ने अपनी रचना में कहा— “सभी समस्याओं का हल है कांटों से आक्रांत चमन का,या तो परशुराम का फरसा या फिर चक्र मदन मोहन का।” गोष्ठी में परम मिश्रा एडवोकेट, राज मंगल दीक्षित, मंजू मिश्रा, कीर्ति दुबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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