मतदान के कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेताओं समेत पुलिस अफसर के घर छापा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कोयला घोटाला और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग की टीमें राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। ताजा घटनाक्रम में ईडी की टीम ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में कोलकाता पुलिस के डीसीपी शांतनु सिन्हा विश्वास और व्यवसायी जय कामदार के ठिकानों पर दबिश दी है। वहीं आयकर विभाग ने भी टीएमसी के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। हाल ही में रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार और विधायक देबाशीष कुमार के दक्षिण कोलकाता स्थित आवास और चुनावी कार्यालयों पर छापेमारी की गई। जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम शांतनु विश्वास के बेहाला स्थित आवास और बलयुगुंगे ऐंड सन एंटरप्राइजेज के मैनेजिंग डायरेक्टर जय कामदार के ठिकानों पर तलाशी लेने पहुंची। रिपोर्टों के मुताबिक, जब टीम डीसीपी के आवास पर पहुंची, तो वहां ताला लगा हुआ था, जिसके कारण अधिकारियों को बाहर ही इंतजार करना पड़ा।read more:https://khabarentertainment.in/home-invasion-dabangs-beat-up-a-villager-the-entire-incident-was-captured-on-cctv-a-case-was-filed-against-the-couple-and-their-son/ कोयला तस्करी मामले में अब तक कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है और शांतनु विश्वास का नाम भी इस जांच के दायरे में आया है। इससे पहले जांच एजेंसी ने चुनाव रणनीतिकार संस्था आईपैक से जुड़े परिसरों पर भी कार्रवाई की थी, जिसमें संस्था के को-फाउंडर विनेश चंदेल की गिरफ्तारी हुई थी। दूसरी ओर, आयकर विभाग ने भी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। हाल ही में रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार और विधायक देबाशीष कुमार के दक्षिण कोलकाता स्थित आवास और चुनावी कार्यालयों पर छापेमारी की गई। अधिकारियों ने कुमार के मनोहरपुकुर रोड स्थित घर पर तड़के तलाशी शुरू की। इसके साथ ही कालीघाट में टीएमसी नेता कुमार साहा और भवानीपुर क्षेत्र में ममता बनर्जी के प्रस्तावक रहे मिराज शाह के ठिकानों पर भी आयकर विभाग की टीमें पहुंचीं। शहर के साल्ट लेक और मिडलटन स्ट्रीट जैसे इलाकों में भी इसी तरह की कार्रवाई देखी गई है। इन ताबड़तोड़ छापों ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। जहां सत्ताधारी दल इसे चुनाव से पहले डराने-धमकाने की राजनीति करार दे रहा है, वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि वे भ्रष्टाचार और अवैध वित्तीय लेनदेन के ठोस इनपुट के आधार पर अपनी कार्रवाई कर रही हैं। चुनाव से ठीक पहले हो रही इन कार्रवाइयों ने मतदाताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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