पहल टुडे रायबरेली –रायबरेली । मुंशीगंज ग्राम सभा कुचरिया भारतीय संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर की 133वीं जयन्ती के पूर्व संध्या पर कुचरिया ग्राम सभा रायबरेली में सामाजिक समरसता एवं संविधान का मूलमंत्र देने वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ‘भारत’ के संविधान निर्माता, भारत रत्न डा. भीमराव अम्बेडकर जी जयंती पर शत – शत नमन करते हुए । कुचरिया ग्राम सभा रायबरेली के तत्वाधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी की अध्यक्षता एवं संचालन एडवोकेट विजय प्रताप एवं विनोद कुमार ने किया । गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि सेना से सेवानिवृत सैनिक एडवोकेट जय सिंह यादव (फौजी) सैनिक समाज सेवा संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि बाबा साहब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं । देश के सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे बाबा साहब द्वारा प्रदत्त भारतीय संविधान का पालन करें । भीमराव अंबेडकर ने समाज में दलितों को समानता दिलाने में काफी संघर्ष किया।read more:https://pahaltoday.com/young-man-brutally-murdered-by-slitting-his-throat-chaos-in-the-house/ बाबा साहेब सामाजिक नवजागरण के अग्रदूत और समतामूलक समाज के निर्माणकर्ता थे। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है । संयोजक एडवोकेट विजय प्रताप एवं भीम आर्मी जिलाध्यक्ष रमेश कुमार नेएवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे इंजीनियर मनोज जी कहा कि आज देश की संवैधानिक संस्थाओं से छेड़छाड़ की जा रही है । संविधान के निमार्ता डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती हर साल 14 अप्रैल को देशभर में मनाई जाती है. बाबा साहब देश के ऐसे एक शख्स थें, जिनकी तुलना किसी और से नहीं की जा सकती. उन्होंने भारत की आजादी के बाद देश के संविधान के निमार्ण में अभूतपूर्व योगदान दिया है. बाबा साहब ने हमेशा से कमजोर और पिछड़ें वर्ग के अधिकारों के लिए काम किया है. बचपन से ही उन्हें आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा है । डॉ. अम्बेडकर के इस जीवन इतिहास से पता चलता है कि वे अध्ययनशील और कर्मठ व्यक्ति थे। सबसे पहले, उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान अर्थशास्त्र, राजनीति, कानून, दर्शनशास्त्र और समाजशास्त्र का अच्छा ज्ञान प्राप्त किया। उन्हें कई सामाजिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपना सारा जीवन पढ़ने-पढ़ाने और पुस्तकालयों में नहीं बिताया। उन्होंने आकर्षक वेतन वाले कई उच्च पदों को अस्वीकार कर दिया । वे अपने दलित वर्ग के शोषित और वंचित लोगों को कभी नहीं भूले। उन्होंने अपना शेष जीवन समानता, भाईचारे और मानवता के लिए समर्पित कर दिया। एडवोकेट जय सिंह यादव (फौजी), और एडवोकेट विजय प्रताप बच्चों को शिक्षा की सामग्री कांपी, रबड़, पेंसिल आदि वितरित की गयी और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया । गोष्ठी को पूर्व बी डी सी सदस्य विनोद कुमार एडवोकेट रमेश कुमार, अजय यादव, विनोद कुमार, इंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, ललन, दुलमदास, राम समुझ, संदीप, प्रदीप, दिवाकर, राजेश, राम बहादुर, पप्पू गौतम, सुनील, भूतपूर्व प्रधान पतिनिधि शिवाकांत शुक्ला, प्रधान प्रतिनिधि पिंटू यादव, प्रांगण में उपस्थित आदि सभी की विशेष भूमिका रही। एडवोकेट विजय प्रताप में दूर दूर से आए क्षेत्रवासी एवं ग्रामवासी सभी का अभिवादन किया गया।