नीतीश के करीबी पर राष्ट्रपति ने फिर जताया भरोसा, राज्यसभा में हरिवंश की हुई ग्रैंड एंट्री

नई दिल्ली।बिहार की राजनीति और देश के उच्च सदन से एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्यसभा के उपसभापति और जनता दल-यूनाइटेड (जेडीयू) के दिग्गज नेता हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर सांसद मनोनीत किए गए हैं। राष्ट्रपति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई के रिटायर होने से खाली हुई सीट पर हरिवंश के नाम पर मुहर लगा दी है। गौरतलब है कि उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को ही समाप्त हुआ था, लेकिन महज 24 घंटे के भीतर उनकी सदन में वापसी ने दिल्ली से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज कर दी है। हरिवंश नारायण सिंह का सफर उत्तर प्रदेश के बलिया से शुरू होकर पत्रकारिता के शिखर और फिर राजनीति के शीर्ष पदों तक पहुँचा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षित हरिवंश ने दशकों तक पत्रकारिता की और प्रभात खबर जैसे बड़े संस्थान को ऊंचाइयों पर पहुँचाया। इसी दौरान वे नीतीश कुमार के संपर्क में आए और राजनीति की मुख्यधारा में शामिल हुए। अपनी विदाई के वक्त उन्होंने भावुक होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया था। उन्होंने कहा था कि पहले ही कार्यकाल में उपसभापति जैसा महत्वपूर्ण पद मिलना उनके लिए गौरव की बात है। हरिवंश की राजनीतिक पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे न केवल नीतीश कुमार के संकटमोचक माने जाते हैं, बल्कि भाजपा नेतृत्व के साथ भी उनके संबंध बेहद प्रगाढ़ हैं। साल 2022 में जब जेडीयू और भाजपा का गठबंधन टूटा, तब भी उन्होंने उपसभापति पद से इस्तीफा नहीं दिया, जिसे बीजेपी के प्रति उनकी निष्ठा और संतुलन बनाने की कला के रूप में देखा गया। नए संसद भवन के उद्घाटन के समय विपक्ष के बहिष्कार के बावजूद उनकी उपस्थिति और पीएम मोदी की तारीफ ने यह साफ कर दिया था कि वे सत्ता के गलियारों में एक अपरिहार्य चेहरा बन चुके हैं। उनकी यह वापसी सदन में उनके अनुभव और कूटनीतिक कौशल को एक बार फिर नई धार देगी।

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