वाराणसी – काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय स्थित समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र में विश्व रंगमंच दिवस (27 मार्च) की पूर्व संध्या पर “ग्रामीण विकास में रंगमंच की भूमिका” विषय पर एक संयुक्त संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र एवं अनुकृति रंगमण्डल, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारम्भ पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों का स्वागत शॉल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर किया गया।संगोष्ठी की अध्यक्षता सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता द्वारा की गई। इस अवसर पर प्रो. आनन्द वर्धन शर्मा (निदेशक, एम.एम.टी.टी.सी.) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि रंगमंच ग्रामीण विकास में जन-जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम है।मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी श्री अनूप अरोड़ा एवं श्री राजेश्वर त्रिपाठी ने रंगमंच की सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, संगोष्ठी में वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. जयन्त रैना (अध्यक्ष, अनुकृति, वाराणसी) सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि रंगमंच ग्रामीण समाज में शिक्षा, जागरूकता और जनसहभागिता बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।कार्यक्रम में संकाय के अध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विषय पर सार्थक चर्चा करते हुए अपने विचार रखे।संगोष्ठी का संयोजन डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय (समन्वयक, समन्वित ग्रामीण विकास केन्द्र) द्वारा किया गया, जबकि समापन पर श्री शिवम पाण्डेय (सचिव, अनुकृति वाराणसी) एवं डॉ. भूपेन्द्र प्रताप सिंह (परियोजना अधिकारी) ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।